Saturday, February 23, 2019

बहु संश्लेषण की प्रक्रिया द्वारा वर्ग संख्या

बहु संश्लेषण की प्रक्रिया द्वारा वर्ग संख्या

सामूहिक 'योजक' निर्देश विभिन्न विषयों की तालिकाओं में अनेक स्थानों पर मिल जाते हैं। निम्नलिखित उदाहरणों में सामूहिक 'योजक' निर्देशों का पालन करते हुए संश्लेषित वर्ग संख्या का निर्माण किया गया है:
(a) शीर्षक First aid in heart diseases की वर्ग संख्या का निर्माण करने के लिए सर्वप्रथम तृतीय सारांश तदुपरान्त संबंधित तालिका में देखने पर वर्ग संख्या 616.12 तथा शीर्षक [Diseases] of heart मिल जाता है। यह एक तारांकित शीर्षक है अत: पाटिप्पणी "Add as instructed under 616.1 - 616.9 " का अनुसरण करते हुए पृ. 868 - 869 में दिए गए निर्देशों तक पहुंच जाते हैं । इन निर्देशों का अवलोकन करने पर 0252 First aid मिल जाता है। अब, निर्देशों के आरंभिक भाग में दी गई टिप्पणी A side from...add to notation for each Term identified by* as follows:" के अनुसार First aid की वर्ग संख्या 0252 को आधार संख्या 616.12 के आगे जोड़ देते है। अतः शीर्षक -
First aid in heart diseases की वर्ग संख्या 616.12 + 0252 = 616.120 252

बहुसंश्लेषण की प्रक्रिया द्वारा वर्ग संख्या निर्माण की विधि की जानकारी देना

(b) शीर्षक Violin performance की वर्ग संख्या का निर्माण करने हेतु, सर्वप्रथम तृतीय सारांश में देखने पर 787 String instruments and their music शीर्षक मिल जाता है। 787 की तालिका में 787.1 Violin शीर्षक दिया हुआ है किन्तु इसके आगे तारा-चिन्ह अंकित है। अत: हम पृष्ठ के नीचे दी गई पाद् टिप्पणी "Add as instructed under 787 - 789 " का अनुसरण करते हुए उसके पहले पृष्ठ में दिए गए निर्देशों तक पहुंच जाते हैं । इन निर्देशों का अवलोकन करने पर 0714 performance शीर्षक मिल जाता है । फिर इन निर्देशों के आरंभिक भाग में दी गई टिप्पणी Add to each subdivision identified by * as follows : के अनुसार performance की संख्या 0714 को आधार संख्या 787.1 के आगे जोड़ देते हैं। अत: शीर्षक Violin performance की वर्ग संख्या -
787.1 + 0714 = 787.107 14 5. अभ्यासार्थ प्रश्न
i) Management of cooperative enterprises ii) Remodeling the architecture of post office buildings iii) Flute concerts iv) Society of library science students v) Motion-picture photography of science vi) Problems in acquisition of government publications in libraries vii) Book selection in national libraries viii) Surgical treatment of ovary diseases ix) Physical chemistry of Potassium
x) Preservation of knitted laces वर्ग संख्याएं । 1) 658.047
2) 725.160 286 3) 788.510 73
4) 371.840 2 5) 778.538 5
6) 025.283 4 7) 025.218 75
8) 618.110 7 9) 546.383 5
10) 746.220 488
6. विस्तृत अध्ययनार्थ ग्रंथसूची 1. DEWEY (Melvil), Dewey Decimal Classification and Relative Index. 19th
ed., Ed by Benjamin A Custer. Albany, N.Y. The Forest Press,
1979. 2. SATIJA (MP), Exercise in the 19th edition of Dewey Decimal
Classification, New Delhi, Concept, Publishing Co., 2001,
260
इकाई - 17 :

निर्माण उद्देश्य

2. विभिन्न तालिकाओं से बहुसंश्लेषित वर्ग संख्याओं का निर्माण करना। संरचना/विषयवस्तु
1. विषय प्रवेश 2. बहुसंश्लेषण की प्रक्रिया 3. बहु संश्लेषण का उदाहरण सहित अध्ययन 4. सारांश 5. अभ्यासार्थ प्रश्न | 6. विस्तृत अध्ययनार्थ ग्रंथसूची 1. विषय प्रवेश
दशमलव वर्गीकरण प्रणाली का मूल स्वभाव सामान्यतया परिगणनात्मक होने के कारण इस प्रणाली में समस्त विषयों को सर्वप्रथम मुख्य वर्गों में तत्पश्चात प्रत्येक मुख्य वर्ग को प्रभागों में। प्रत्येक प्रभाग को अनुभागों में, तथा प्रत्येक अनुभाग को उप-अनुभागों में उत्तरोत्तर विभक्त करते जाते है। इस संपूर्ण प्रक्रिया में किसी एक विषय के विभिन्न पक्ष अलग-अलग अनुभागों या उप-अनुभागों या फिर सारणियों में वर्गीकृत किए हुए मिल सकते हैं। पिछले अध्यायों में संश्लेषण की प्रक्रिया द्वारा वर्ग संख्या निर्माण की विधियों का अध्ययन किया। उन अध्यायों में किसी आधार संख्या के आगे तालिकाओं अथवा सारणियों से सम्पूर्ण वर्ग संख्या या उसका एक अंश जोड़ने के निर्देश दिए गए थे।
इस अध्याय में दिए गए विभिन्न उदाहरणों में बहु संश्लेषण की प्रक्रिया द्वारा वर्ग संख्या निर्माण की विधि का विश्लेषण किया गया है। साथ ही, वर्ग संख्याओं या उनके उन अंशों, जिन्हें बहुसंश्लेषण की प्रक्रिया में जोड़ना है, को दृष्टांत में समान्तर चतुर्भुज के अंदर रखा गया है। किसी वर्ग संख्या के आगे दिए गए शीर्षक के अर्थ को स्पष्ट करने के लिए आवश्यकतानुसार उसके विस्तृत शीर्षक को दीर्घ कोष्ठक में दिया गया है। जो उदाहरणों से स्पष्ट होगा।

2. बहुसंश्लेषण की प्रक्रिया

विशिष्टीकरण तथा मिशन-अभिमुख शोध के युग में बहु पक्षिक विषयों पर प्रलेखों का प्रकाशित होना एक साधारण बात हो गई है। अनेक बार ऐसे विषयों के वर्गीकरण की आवश्यकता हो जाती है जिनके विभिन्न पक्ष तालिकाओं तथा सारणियों में दो से भी अधिक स्थानों पर वर्णित हैं। ऐसे बहु पक्षिक विषयों के वर्गीकरण के लिए संश्लेषण की प्रक्रिया को अनेक बार दोहराने की आवश्यकता पड़ती है। वर्गीकरण की सम्पूर्ण प्रक्रिया में संश्लेषण की प्रत्येक अवस्था के लिए स्पष्ट निर्देश दो तरह से दिए जा सकते हैं। यह निर्देश या तो मूल आधार संख्या के ही साथ दिए होते हैं या मूल आधार संख्या के साथ केवल एक अन्य वर्ग संख्या या उसके अंश को जोड़ने के निर्देश मिलते हैं। यहां पहुंचने पर पुनः जोड़िए निर्देश मिल जाते हैं। इस प्रकार अंकों की एक कड़ी के साथ दूसरी कड़ी जुड़ती चली जाती है। और अंत में विभिन्न वर्ग संख्याओं या उनके अंशों को जोड़कर बनी अंतिम वर्ग संख्या में तीसरे अंक के पश्चात एक दशमलव बिन्दु लगाकर बहु संश्लेषण की प्रक्रिया पूर्ण की जाती है।
बहु संश्लेषण की प्रक्रिया में आधार संख्या का निर्धारण अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। इसी आधार संख्या के साथ अन्य पक्षों को जोड़ने के निर्देश मिलते हैं। आधार संख्या के निर्धारण में दशमलव वर्गीकरण प्रणाली के आधारभूत ढांचे की जानकारी की प्रमुख भूमिका होती है। यदि उचित आधार संख्या का निर्धारण कर लिया जाय तो अन्य पक्षों को जोड़ने के लिए उत्तरोत्तर निर्देश मिलते जाते हैं। वैकल्पिक रूप में, स्वानुभाविक विधि का प्रयोग किया जा सकता है। और प्रत्येक उचित होने वाले पक्ष से आरंभ करके संश्लेषण की प्रक्रिया की जांच की जा सकती है। जिस पक्ष की वर्ग संख्या के अंतर्गत संश्लेषण का प्रावधान है उसी को आधार संख्या मानकर बहु संश्लेषित वर्ग संख्या का निर्माण किया जा सकता है।
इस प्रक्रिया में अनेक स्तरों पर पूर्ण वर्ग संख्या अथवा उसका एक अंश जोड़ने का प्रावधान होता है। अत: संश्लेषण की प्रक्रिया के प्रत्येक स्तर से संबंधित वर्ग संख्याओं को अभ्यास पुस्तिका में उत्तरोत्तर लिखते जाना चाहिए। इससे अंतिम बहुसंश्लेषित वर्ग संख्या निर्मित करते समय जोड़ने में असुविधा न हो।