Tuesday, June 23, 2020

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ईको. फ्रेंडली दिवाली

त्योहारों ने दस्तक दे दी है। जगमग खुषियां माहौल में सराबोर हो गई हैं जो हमारे मन को प्रफुल्लित किए जा रही हैं। पर्वों के इस मौसम ने जहां हमारे मूड को खुषनुमा बना दिया है वहीं सकारात्मक ऊर्जा ने इस पर्व की तैयारियों को विषेश बनाने का जोष भर दिया है। सामान्यतः दीवाली पर अधिकांष लोग जगमगाते दीयों के स्थान पर लाइटिंग के साथ तेज़ धमाके वाले पटाखे फोड़ते हैं जो ध्वनि व वायु प्रदूशण बढ़ाते हैं। इस पर्व पर बड़े महानगरों में प्रदूशण का स्तर इतना बढ़ जाता है कि अनेक व्यक्तियों को सांस लेने में समस्या उत्पन्न हो जाती है। ऐसी परिस्थिति में अब समय की आवष्यकता है कि हम ग्रीन दीपावली मनाने की ओर कदम बढ़ाएं, जो प्रदूशण रहित हो। चूंकि हमारी सनातन परंपरा चिरकाल से पर्यावरण की पोशक रही है, ऐसे में हमें पर्यावरण हितैशी और सुरक्षित दीवाली मनाने के बारे मंे ज़रूर सोचना होगा।

पूरा रखें ध्यान

अब तक आपने अपने आषियाने का कोना-कोना चमका दिया होगा। परिजनों व मित्रों के लिए उपहार भी ख़रीद लिये होंगे। लक्ष्मी पूजन की तैयारी कर ली होगी। मेहमानों की सूची बना ली होगी। घर पर ही स्नैक्स बनाकर उन्हें सीलन से बचाने केउचित उपाय भी कर लिये होंगे। सजावट के लिए रंग-बिरंगी झालरें भी ख़रीद ली होंगी। थोक बाज़ार जाकर पटाखों का बंदोबस्त कर लिया होगा किंतु क्या इन सबके साथ आपने वातावरण के बारे में तो कुछ भी नहीं सोचा होगा। हमारी तरह हमारा वातावरण भी दीवाली सेलिब्रेट करेगा परंतु हम सेलिब्रेषन लायक उसे छोड़ेंगे ही नहीं। दीवाली के हर्शाेल्लास में हम अपने पर्यावरण की पूरी तरह अनदेखी कर देते हैं। हम भूल जाते हैं कि हमारी हर एक तैयारी और सेलिब्रेषन से वातावरण बहुत प्रभावित होता है। आपके द्वारा अपनाए जाने वाले प्लास्टिक रैपर्स, गिफ्ट रैपर्स, प्लास्टिक के बैग, प्लास्टिक का सजावटी सामान, पटाखे, मूर्तियों पर पुते खतरनाक रंग, कैमिकल व कलर युक्त मिठाइयांकृऔर भी न जाने क्या-क्या। इनका हमारे पर्यावरण पर बुरा असर पड़ता है। दीवाली मनाने का पुरातन व परंपरागत तरीका लगभग लुप्त हो रहा है और आज पर्व से जुड़ा प्रत्येक आयाम हमारे वातावरण के लिए ज़हरीला बन गया है। समय के बदलाव के साथ दीवालीमनाने के तरीके भी बदल गए हैं। अगर समय रहते पर्यावरण को बचाया नहीं गया तो आषंका है कि रोषनी का पर्व अंधकारमय न हो जाए। ग्लोबल वाॅर्मिंग के कारण पल-पल बदलती फ़िजा में सेलिब्रेषन के लिए जागरूकता व ग्रीन सेलिब्रेषन के टिप्स की बेहद आवष्यकता है।

फूलों-माटी का मोह

इस दीवाली काग़ज़ या फ़िर कपड़ों के फूलों के बजाय बेहतर होगा कि आप प्राकृतिक फूलों से अपना घर सजाएं। प्लास्टिक के फूल पर्यावरण के लिए हानिकारक होते हैं। वहीं प्राकृतिक फूलों से न केवल घर महकता है बल्कि इनकी ताज़गी से मन भी प्रसन्न रहता है। प्राकृतिक फूलों से रंगोली भी बनाई जा सकती है। घर को सजाने के लिए आप लाइटों की जिन लड़ियों का इस्तेमाल करते हैं, वे हमारे लिए हानिकारक साबित होती हैं। इनसे बिजली की खपत बढ़ जाती है, जिससे हमारे बहुमूल्य संसाधन की बर्बादी होती है। आप चाहें तो मिट्टी के दीयों से अपना घर-आंगन सजा सकते हैं। ग्रीन दीवाली मनाने की दिषा में आपका यह प्रयास हितकारी होगा। इसके लाभ भी बहुत हैं। ये पर्यावरण के लिए सुरक्षित होते हैं, बिजली की खपत भी नहीं होती तथा आपके आवास को एथनिक लुक मिलता है। इतने फ़ायदों के बीच आप तेल पर होने वाला खर्चा तो नज़रंदाज़ कर ही सकते हैं।

स्वयं करें तैयारी

इस दीवाली तोरण, झालरें, रंगीन दीपक, गिफ्ट रैपर, कार्ड आदि बाज़ार से न ख़रीदें बल्कि स्वयं बनाएं। हाथ से बने ये उत्पाद पूरी तरह से पर्यावरण अनुकूल होंगे। इन्हें बनाने के लिए बिंदी, अख़बार, कपड़े के रिबन, पुराने कपड़े, चुनरी व साड़ी का उपयोग कर सकते हैं। प्रकृति के निकट रहना चाहते हैं तो फल, फूलों, सब्जियों, पत्तियों आदि से प्राकृतिक रंग बना सकते हैं। घर को महकाने व रोषन करने के लिए आप आॅर्गेनिक तरीके अपनाएं। रूम फ्रेषनर अगरबत्ती, रंगोली के लिए ताज़े फूलों, दालों, चावल के पाउडर व मसालों का उपयोग करें। बाज़ार में मिलने वाली मिठाइयांे में मिलावट का अंदेषा अधिक होता है। अतः मिठाई बाज़ार से ख़रीदकर लानेके बजाय आप घर पर ही बेसन के लड्डू, रवा लड्डू, मैसूर पाक, गाजर का हलवा, षक्करपारे, खीर आदि बना सकते हैं। कहते हैं कि खुषियां बांटने से दोगुनी हो जाती हैं। इसलिए आप दीवाली सामूहिक रूप से मनाएं। मित्रगणों को किसी ग्राउंड में बुलाकर त्योहार का आनंद लें। सेलिब्रेषन का समय तय कर लें, क्यों है न ग्रीन दीवाली का बेहतरीन तरीका।

ईको-फ्रेंडली आदर-सत्कार

इस अवसर पर मित्रों व संबंधियों का आना-जाना लगा रहता है। उनका आदर-सत्कार कुछ ख़ास ढंग से करें। उन्हें पकवान महंगी क्राॅकरी के बजाय केले के पत्तों व मिट्टी के बर्तनों में परोसें। यह ईको-फ्रेंडली तरीका सभी का दिल जीत लेगा। रोषनी के इस पर्व पर आप अपनों को हर्बल प्रोडक्ट उपहार स्वरूप दे सकते हैं। बाज़ार में आजकल इस तरह के उत्पादों की लंबी रेंज उपलब्ध है। हर घर में नए वस्त्र ख़रीदे जाते हैं। आप चाहें तो आॅर्गेनिक क्लाॅथ से बनी पोषाकें ख़रीद सकते हैं। इन उपायों को अपनाकर आप अपनी दीवाली को विषुद्ध रूप से पर्यावरण अनुकूल बना सकते हैं।