Tuesday, June 23, 2020

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खुले आसमान में

गुरप्रीत ढिंढसा हमें हिमाचल प्रदेष के बीर और बिलिंग इलाके की सैर करा रहे हैं जो पैराग्लाइडिंग के लिए भारत के मषहूर केंद्र हैं।

मैं पहली बार बीर चंडीगढ़ से 1996 की षरद ऋतु में स्कूटर से गया था। मैं अपने साथ एक ग्लाइडर ले गया था और मैंने बिलासपुर से एक रूसी पायलट को लिफ्ट भी दी थी। हम षाम को बीर पहुंचे तो थककर चूर हो चुके थे। हमें एक ही गेस्ट हाउस मिला, जिसमें बेड इतने छोटे थे जो एक पंजाबी और रूसी के लिए पर्याप्त नहीं थे। अगले दिन हिमाचल प्रदेष के खुले इलाके में पहली बार पैराग्लाइडिंग करने की तैयार में लगे होने के कारण मैं उस रात ठीक से सो भी नहीं पाया था।

अनोखा अनुभव

पैराग्लाइडिंग के दौरान जितना सम्मोहित मैं हुआ, उससे पहले कभी नहीं हुआ था। मैं धौलाधार पर्वतमाला के ऊपर किसी बाज के समान उड़ रहा था। मैं पिछले 22 सालों से फ्लाइंग और 19 वर्शों से पैराग्लाइडिंग कर रहा हूं। मैंने बीर एवं बिलासपुर को सुदूर ग्रामीण इलाकों से पैराग्लाइडिंग के मषहूर केंद्र बनते देखा है। अब तो यहां पर कई आरामदायक गेस्ट हाउस भी खुल गए हैं। 1985 में पहली हैंग-ग्लाइडिंग प्रतियोगिता आयोजित हुई थी। बस, तब से लेकर अब तक बीर फ्लाई करने वालों का प्रमुख केंद्र बन गया है। यह इलाका कई सालों तक अपेक्षाकृत गुमनाम रहा, जब तक कि यहां पर्यटकों को आकर्शित करने के लिए टैन्डम पैराग्लाइडिंग की षुरुआत नहीं की गई। पैराग्लाइडिंग के षौक के कारण मैं देष और विदेष में कई जगहों पर जा चुका हूं। अब कोई मुझसे जब यह पूछता है कि आपकी पसंदीदा जगह कौन सी है, तब मैं स्पश्ट रूप से चयन करने में असमर्थ पाता हूं। हालांकि इतने सालों बाद मैं इस खेल के प्रषिक्षण के लिए बीर एवं बिलिंग को बेहद सुंदर एवं चुनौती से परिपूर्ण स्थल मानता हूं।

विषेश आकर्शण

प्राकृतिक सौंदर्यः  धौलाधार पर्वतमाला के ऊपर तथा रावी एवं ब्यास नदियों के बीच लगभग 150 किलोमीटर लंबे इलाके में उड़ान भरना इतना आनंददायक होता है, जिसे षब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है। फ्लाई करने वाले उड़ान तो बिलिंग से भरते हैं किंतु समस्त पर्वत श्रृंखला के ऊपर उड़ते हैं, जिनमें डलहौज़ी एवं मंडी के पहाड़ और कुल्लू घाटी षामिल हैं। धौलाधार में सपाट मैदान के अलावा अचानक से बर्फ़ से ढकी षानदार पर्वतमालाएं देखने को मिलती हैं, जो समुद्र तल से तकरीबन 5,000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित हैं।

बीर में पैराग्लाइडिंग करना न केवल रोमांच से भरा होता है बल्कि अधिक खर्चीला भी नहीं होता है। यूरोप में जितना खर्चा होता है, उससे एक-तिहाई कम खर्च में आप यहां पर प्रषिक्षित एवं कुषल इंस्ट्रक्टरों से पैराग्लाइडिंग सीख सकते हैं।

मौसमः धौलाधार पर्वतमाला के बसे हुए इलाके समुद्र तल से 1,400 से 1,600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित हैं। बिलिंग मंे जहां से टेक-आॅफ़ करते हैं वह जगह भी समुद्र तल से 2,400 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। इस कारण से सारे साल यहां सुहावना मौसम रहता है। पैराग्लाइडिंग के लिए मार्च-अप्रैल और अक्टूबर-नवम्बर उपयुक्त समय होता है। बसंत एवं षरद में दिन-रात को बढ़िया मौसम होता है और ज़्यादा ठंड भी नहीं होती। उड़ान भरने का उपयुक्त समय सवेरे 10-11 बजे से लेकर षाम 5 बजे तक होता है। उस समय पष्चिम की ओर से आने वाली हल्की हवाएं चल रही होती हैं।

परिवहन व रहने की सुविधाः बीर में आप लगभग 300 रुपए में होमस्टे की सुविधा और 3,500 रुपए में होटल का कमरा पा सकते हैं। इस खेल का मुख्य केंद्र मंडी से पठानकोट जाने वाले राश्ट्रीय राजमार्ग के करीब स्थित और पहाड़ों की तराई में बसे गांवांे तक पहुंचने के लिए सड़कों का जाल बिछा हुआ है। यहां बड़ी संख्या में स्थानीय बसें चलती हैं और टैक्सियां आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं। टेक-आॅफ़ पाॅइंट तक जाने के लिए प्रति व्यक्ति 100-150 रुपए देकर साझा टैक्सी की भी सुविधा पा सकते हैं। पैराग्लाइडिंग के उतरने की जगह पर मोबाइल नेटवर्क उचित ढंग से कार्य करता है। गांववाले एवं किसान बेहद मित्रवत स्वभाव के होते हैं। अगर आप उनके खेतों में उतर जाते हैं तब भी वे गुस्सा नहीं होते।