Tuesday, June 23, 2020

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नए स्वरूप में सामान्य

वैष्विक स्तर पर फैली महामारी के कारण भारत में वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग का दौर बढ़ गया है। भले ही वह देष के भीतर हो अथवा देष के बाहर हो। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देष लोगों तक अपनी पहुंच बनाने में अग्रसर है और नवीन तकनीक अपना रहा है। साथ ही, संकट इस घड़ी को सुअवसर बना लिया है

महामारी फैलने के बावजूद हमारे आसपास दुनिया तेज़ी से बदल रही है, राजनयिक रिष्ते अपनी चरम सीमा पर हैं और हम अन्य देषों के साथ बेहतर आपसी संबंध बनाने में अग्रसर हैं। हर पल दुनिया के हर एक हिस्से में कोई न कोई आयोजन हो रहा है। लगातार नई सूचनाएं प्राप्त हो रही हैं। तीव्र, प्रभावषाली और निरंतर सूचनाओं की प्राप्ति होती रहे, वैष्विक स्तर के राजनयिक संबंधों में यह नितांत आवष्यक हो गया है। खासकर ऐसे समय में जब दुनिया भर में विकट संकट का दौर व्याप्त हो। देष के अनेक देषों में लाॅकडाउन चल रहा है और सामाजिक दूरी बनाए रखना बेहद आवष्यक हो गया है, ऐसे में राजनेताओं की यात्राएं भी स्थगित हो गई हैं। किंतु राजनयिक संबंधों पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने इस संकट की घड़ी को भी सुअवसर में बदल लिया है। अब तो नियमित रूप से अन्य देषों के राजनयिकों से वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संपर्क साधा जा रहा है। महामारी को फैलने से रोकने के लिए यह बहुत आवष्यक है कि अन्य देषों के नेताओं से सलाह की जाए। समन्वय स्थापित किया जाए, यही सब तकनीकी साधन से संभव हो रहा है। इसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं। पहले की अपेक्षा अब अन्य देषों के प्रमुखों से प्रभावषाली

वर्चुअल कूटनीति, सफल परिणाम

गत दो माह में संकट इस दौर में आयोजित अनेक वर्चुअल काॅन्फ्रेंस और संगोश्ठियों में भारत सरकार ने बढ ़-चढ़कर हिस्सा लिया। दक्षिण एषियाई नेताओं के सम्मेलन में भारत ने सफलतापूर्वक नेतृत्व किया। भारत ने वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी को बताया कि किस प्रकार से हम मिलकर कोरोना के प्रकोप को कम कर सकते हैं। इस दिषा में दक्षिण एषियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) के सदस्य देषों को एकजुट होकर कार्य करने के लिए प्रेरित किया। नई दिल्ली ने जी20 को भी 26 मार्च को वीडियो बैठक के लिए प्रेरित किया। बस तभी से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, यूरोपीयन यूनियन एवं नाटो सभी ने वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के माध्यम से एक दूसरे से संपर्क साधने का कार्य किया। श्री मोदी ने 4 मई को गुट-निरपेक्ष सम्मेलन के आॅनलाइन सम्मेलन में हिस्सा लिया। इसमें अन्य 30 देषों और सरकारों के अध्यक्षों के अलावा अमेरिका के राष्ट्रपति तथा विष्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेषक ने भी हिस्सा लिया था। 2014 में प्रधानमंत्री बनने पर अपने पहले भाषण से लेकर आज तक श्री मोदी ने सुधारों पर ही बल दिया है। वैष्विक स्तर पर सभी को मिल-जुलकर कार्य करने की सलाह दी है। संकट के इस दौर में भी उन्होंने विष्व के सभी राजनेताओं को कोविड-19 से मिलकर लड़ने का मंत्र दिया है।

वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भारत के राश्ट्रपति रामनाथ कोविंद को अपना परिचय देते दक्षिण कोरिया, सेनेगल, त्रिनिदाद एवं टोबेगो, माॅरिषस, आॅस्ट्रेलिया, कोट डि’आइवर तथा रवांडा के राजदूत और उच्चायुक्त
प्रधानमंत्री श्री मोदी ने 4 जून को पहली बार द्विपक्षीय ‘वर्चुअल समिट’ किया, जब वह आॅस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्काॅट माॅरिसन से वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मिले। गत 18 माह में यह दोनों नेताओं की चैथी बैठक थी।
भारत और आॅस्ट्रेलिया ने इस बात पर बल दिया कि वे अपने आपसी राजनयिक संबंधों को और मज़बूती प्रदान करेंगे। 2009 में समाप्त द्विपक्षीय सामरिक साझेदारी को नया स्वरूप प्रदान करते हुए व्यापक सामरिक साझेदारी अपनाएंगे। साथ ही रक्षा तथा विदेष मंत्रालय के स्तर पर ‘2 जमा 2’ की नीति अपनाएंगे। इनके अतिरिक्त, मूलभूत सेवाओं, जल प्रबंधन, आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन, साइबरस्पेस और कृशि क्षेत्र से संबंधित अन्य घोशणाएं और समझौते भी वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के माध्यम से किए गए। कोविड-19 की दवा खोजने के काम और अनुसंधान के लिए भी दोनों देषों ने नया साझा कोष बनाया। इस बैठक का एक अन्य अहम पहलू यह था कि दोनों देषों ने तय किया कि वे समुद्र से संबंधित सुरक्षा बढ ़ाने को लेकर आपसी तालमेल बढ़ाएंगे। श्री मोदी ने भारत-प्रषांत क्षेत्र में सुरक्षा को पूरी दुनिया के लिए बेहद खास बताया। आॅस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री ने श्री मोदी की सराहना की और कहा कि इस क्षेत्र में सौहार्द व समृद्धि लाने की दिषा में भारत की अहम भूमिका है। केवल श्री मोदी ही नहीं बल्कि भारत के विदेष मंत्री डाॅ. एस. जयषंकर ने भी विदेष मंत्रियों के साथ अनेकों बार वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग की। उन्होंने ब्रिक्स तथा एससीओ (षंघाई सहयोग संगठन) के विदेष मंत्रियों के साथ बैठकें कीं। भारत-अफ्रीका का चैथा षिखर सम्मेलन जो सितंबर में होना तय है, वह भी वर्चुअल माध्यम से ही होगा।

बेंगलूरू स्थित राजीव गांधी स्वास्थ्य विज्ञान विष्वविद्यालय के 25वें स्थापना दिवस पर अधिकारियों को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते प्रधानमंत्री श्री मोदी

उच्च-स्तरीय राजनयिक बैठकों के अलावा, दुनिया के विभिन्न देषों में स्थित भारतीय मिषनों के अध्यक्षों से भी वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बातचीत होती रही। भारत का विदेष मंत्रालय हाल ही के दिनों में समय≤ पर विभिन्न क्षेत्रों और उप-क्षेत्रों के भारतीय राजदूतों से वार्ता करता रहा। 23 अप्रैल, 2020 को भारत के विदेष मंत्री ने ट्वीट किया, ‘‘कोरोना के दौर में राजनयिक परिदृष्य बिलकुल बदल गया है। वर्चुअल माध्यम से आपसी मित्रता और प्रगाढ ़ हो रही है। उन्होंने भारतीय राजदूतों तथा विष्व के अन्य देषों के विदेष मंत्रियों से हुई बैठकों का हवाला दिया। हाल ही में भारत के विदेष मंत्री ने दक्षिण कोरिया के विदेष मंत्री कांग क्युंग-वा तथा ब्रिटेन के विदेष मंत्री डोमिनिक राब से विस्तारपूर्वक बातचीत की।

डिजिटल युग

बेषक दुनिया भर के नेताओं को वर्चुअल काॅन्फ्रेंस के माध्यम से नई प्रकार की चुनौतियों का भी सामना करना पड़ेगा। रू-ब-रू बैठक में तो हम एक दूसरे का विष्वास जीत सकते थे और अपनी बात प्रभावषाली ेल रहे हैं, इस स्थिति में ऐसी बैठकें कम समय में आयोजित हो जाती हैं। यह कम खर्चे में बेहतरीन राजनयिक संबंध बनाने की विधि है।

भारत के विदेष मंत्री डाॅ. एस. जयषंकर एवं सचिव (पूर्व) विजय ठाकुर सिंह (दाएं) दक्षिण कोरिया के विदेष मंत्री कांग क्युंग-वा से वर्चुअल मीटिंग करते हुए

भारत के लिए तो यह व्यापक वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग समाधान विकसित करने के समान है। इसके माध्यम से डिजिटल इंडिया अभियान को प्रचारित व प्रसारित किया जा रहा है। इन्हें बढ ़ावा देने की दिषा में सरकार ने गत माह नवाचार चुनौती अभियान को भी आरंभ किया। इसमें युवाओं से इस क्षेत्र में आने वाली कठिनाइयों को दूर करने के हल तथा उनकी नई खोज मांगी गई थीं। साॅफ्टवेयर उत्पाद पर राष्ट्रीय नीति के अनुसार, इस अन्वेषण का मकसद यह था कि स्थानीय विषेषज्ञों की मदद से वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के भारतीय टूल विकसित किए जाएं। इसके लिए 30 अप्रैल तक आवेदन पत्र मंगवाए गए थे। विजेता कंपनी को अनुबंध किया जाएगा और उसके उत्पाद सरकार द्वारा अगले चार साल के लिए उपयोग में लाए जाएंगे। अब जब भारत वर्चुअल स्पेस में कारोबार करने लगा है तब सरकार भी साइबर सुरक्षा को लेकर कड़े कदम उठा रही है। ये कदम केवल सरकारी कामकाज और सार्वजनिक क्षेत्र में गतिविधियों के लिए नहीं अपितु नागरिकों के लिए भी कारगर होंगे। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने विस्तार से उन नागरिकों के लिए दिषा-निर्देष जारी किए हैं जो विभिन्न काॅन्फ्रेंसिंग ऐप इस्तेमाल करते हैं। इसमें डेटा सुरक्षा और अन्य प्रचालन संबंधित हिदायतें दी गई हैं। वर्तमान में इस अस्थिर माहौल में अंतरराष्ट्रीय वर्चुअल सम्मेलनों तथा संगोष्ठियों का महत्त्व बढ़ गया है। दो विभिन्न देषों के बीच आसानी से संपर्क साधे जा रहे हैं और आपसी रिष्ते सुदृढ़ किए जा रहे हैं। निकट भविष्य में जब दुनिया के अनेक देष कोविड-19 महामारी से उत्पन्न चुनौतियों से निपटने में लगे हुए हैं। विष्व में किसी को भी कहीं पर जाने की मनाही है, ऐसी परिस्थिति में व्यापक स्तर पर वर्चुअल संगोष्ठियों और सम्मेलनों का ही दौर चलेगा। संभवतः यही आगे चलकर राजनयिक मेलजोल बढ़ाने का नया मंच बन जाए।