Tuesday, June 23, 2020

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अद्भुत

यदि भारत में स्विट्ज़रलैंड देखना है तो औली अवष्य जाएं। वीरेंद्र सिंह नेगी बता रहे हैं कि उत्तराखंड स्थित औली में आप पहाड़ों पर बिछी बर्फ़ की सफेद चादर पर स्कीइंग का आनंद ले सकते हैं।

उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्र में जहां एबर्फ़ से आच्छादित ।̊ंची-।̊ंची पर्वतमालाएं देखने को मिलती हैं। वहीं दूसरी ओर यहां की षिवालिक पहाड़ियों पर घने वृक्षों से लदे विषाल वन क्षेत्र बिंसर, दूधातोली, पडियार, जिम काॅर्बेट, राजाजी राश्टंीय उद्यान एवं राठ क्षेत्र इत्यादि भी देखने को मिलते हैं। इनके बीच से होकर देष की पवित्र नदियां सरस्वती, अलकनंदा, भागीरथी, पिंडर, काली गंगा, पूर्वी नयार, पष्चिमी नयार आदि छोटी-बड़ीनदियां बहती हैं। इन नदियों की घाटियों में विभिन्न प्रकार की जड़ी-बूटियां हिसुर, किनगोड़, करौंदा, बिच्छू बूटी, कटरी, झिंगोर, काली हिसुर व कहीं फूलों की बहार वाली घाटियां देखने को मिलती हंै। इनके दर्षन करने देष-विदेष से सैलानी यहां खिंचे चले आते हैं। सर्दियों में यहां होने वाली बर्फ़बारी एवं बर्फ़ पर खेले जाने वाले अंतरराश्टंीय स्तर के खेलों को देखने भी पर्यटक यहां बड़ी संख्या में पहुंचते हैं।

प्रकृति का उपहार

उत्तराखंड प्रकृति के विस्मयकारी स्वरूप व भौगोलिक विविधताओं का धनी राज्य है। इसके औली क्षेत्र में आप नैसर्गिक नज़ारों के साथ-साथ यहां साहसिक खेलों का आनंद भी उठा सकते हैं। हर ऋतु अपनी नैसर्गिक छटा बिखे़रकर इस क्षेत्र को एक अलग ही रूप प्रदान करती है। औली क्षेत्र इतनी विविधताओं के बीच बसा बर्फ़ तथा घास का ऐसा मैदान (बुग्याल) है, जो स्विट्ज़रलैंड की बर्फ़ीली भूमि की याद दिलाता है। औली बर्फ़ की ष्वेत चादर ओढ़े पर्यटकों को अपनी ओर इस प्रकार आकर्शित करता है कि यदि पर्यटक एक बार यहां की बफीऱ्ली

यहां अंतरराश्टंीय स्तर तक के स्कीइंग खिलाड़ी भी बने हैं। यहां देष-विदेष से भारी संख्या में पर्यटक स्कीइंग का आनंद उठाने तथा स्कीइंग का प्रषिक्षण लेने पहुंचते हैं। औली में गढ़वाल मंडल विकास निगम का स्कीइंग प्रषिक्षण केंद्र भी है। यह रोप-वे टाॅवर नंबर - 10 के निकट स्थित है। स्कीइंग का प्रषिक्षण लेने के लिए कम से कम 12 साल की उम्र होनी चाहिए। यहां स्कीइंग करने के लिए ऋशिकेष, देहरादून तथा दिल्ली से एडवांस बुकिंग की जाती है। यहां स्कीइंग करते समय ढलान के एक छोर से दूर, दूसरे छोर पर दो छड़ों 1⁄4स्टिल्ट1⁄2 और स्की की सहायता से तेज़ी से बर्फ़ पर फ़िसलना तथा बर्फ़ से आच्छादित पर्वतों के बीच बर्फ़ से ढकी घाटी में चारों ओर घूमना बेहद रोमांचकारी होता है।

यादगार सफ़र

औली में स्कीइंग का केंद्र होने के साथ-साथ पडियार घाटी सदाबहार वन क्षेत्र भी है। औली का क्षेत्र जोषीमठ से लगभग दस किलोमीटर की दूरी से प्रारंभ हो जाता है। जोषीमठ से औली टैक्सी से तथा गंडोला 1⁄4केबल सिस्टम ‘रोप-वे’1⁄2 से भी पहुंचा जा सकता है। रोप-वे से औली तक पहुंचने के लिए टिकट मिलने का समय सुबह आठ बजे से लेकर षाम चार बजे तक होता है। रोप-वे द्वारा घने देवदार के वृक्षों के वन के ।̊पर से होते हुए तथा बर्फ़ से ढकी ।̊ंची-।̊ंची पहाड़ियों को देखते हुए सीधे बुग्यालों के ।̊परी हिस्से में पहुंच जाते हैं। वाकई यह अनुभव एक यादगार सफ़र बन जाता है। औली से लगभग दो किलोमीटर दूर पडियार मंदिर तथा गाॅरसाॅन टाॅप है। यहां पहंुचने के लिए लगभग आधे घंटे की पैदल यात्रा करके चढ़ाई करनी पड़ती है। रास्ते में देवदार, ओक, बुरांष, अल्पाइन के वृक्षों से भरा घना वन क्षेत्र मिलता है। चलते-चलते अचानक वन क्षेत्र समाप्त होते ही जो दृष्य सामने आता है, वह मन को मंत्रमुग्ध कर देने वाला होता है। सामने हिमालय की प्रमुख चोटियों, पर्वतों एवं बुग्याल के दर्षन होते हैं। इनमें से मुख्यतः नंदादेवी पर्वत, द्रोण पर्वत, हाथी पर्वत, मन पर्वत 1⁄4कामत1⁄2 त्रिषूल, गाॅरसाॅन बुग्याल आदि हैं। सैलानी हिमालय की भव्यता को अपने कैमरे में कैद कर अपने साथ ले जाते हैं। गाॅरसाॅन टाॅप पर सरकार ने हेली-स्कीइंग बनाने का प्रस्ताव भी रखा है।

तो क्या विचार है, आप भी आॅली जाने का कार्यक्रम बना लें।