Tuesday, June 23, 2020

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रोगो से लड़े लोग


ऋशिकेष में अंतरराश्ट्रीय योग महोत्सव (1-7 मार्च) मनाया जाएगा। ऐसे में डाॅ राजीव रस्तोगी हमें योगाभ्यास से होने वाले लाभ की ज्ञानवर्धक जानकारी दे रहे हैं।भारत में लगभग 5,000 वर्शों से भी अधिक वर्श पहले योग की उत्पŸिा हुई थी। महर्शि पतंजलि योग के जनक माने जाते हैं। आज योग की चर्चा भारत में ही नहीं बल्कि सारी दुनिया में हो रही है। संयुक्त राश्ट्र ने जब से 21 जून को ‘अंतरराश्ट्रीय योग दिवस’ घोशित किया है योग की लोकप्रियता अपनी चरम सीमा पर है। योग के इस वातावरण में जब सारी दुनिया योगमय हो रही है तो क्यों न हम भी अपनी सेहत सुधारने, रोगों से बचने, उनके प्रबंधन तथा उचित, सकारात्मक एवं स्वस्थ जीवनषैली के लिए योग को अपने जीवन में अपनाने की आदत डालें।

सेहत की कुंजी

आज हर व्यक्ति स्वयं को जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में बेहतर से बेहतर बनाने के प्रयास में लगा है। वह खुद को ऐसी ऊंचाइयों पर ले जाना चाहता है जहां उसका जीवन सुख, समृद्धि और खुषहाली से भर जाए। इसके लिए वह नित्य नए-नए प्रयास करता है। व्यक्ति विभिन्न साधनों द्वारा अपना जीवन सुधारना चाहता है। कामयाबी के इस सफ़र में कई लोग सफल हो जाते हैं किंतु कुछ सफलता पाकर भी असंतुश्ट ही रहते हैं। उनके पास भौतिक सुख-सुविधाओं के सभी साधन तो उपलब्ध होते हैं परंतु एक चीज़ की कमी रह जाती है। वह है स्वस्थ षरीर और स्वस्थ मन। षरीर और मन स्वस्थ होने से आप जीवन को अधिक आनंदपूर्णनियमित अभ्यास

तो आइए, योग से ही दिन का आरंभ करें। यदि आप स्वस्थ हैं, अपने स्वास्थ्य को बनाए रखना तथा रोगों से बचे रहना चाहते हैं तब योग से बढ़िया कोई उपाय नहीं है। आप कुछ चुने हुए आसनों जैसे सूर्य नमस्कार, ताड़ासन, कटिचक्रासन, पवनमुक्तासन, नौकासन, भुजंगासन, षलभासन, धनुरासन, वज्रासन तथा षवासन का अभ्यास कर सकते हैं। इसके साथ ही गहरी सांस लेने, नाड़ी षोधन प्राणायाम करने तथा ध्यान का अभ्यास करने से आप अपनी जीवनषैली में गुणात्मक परिवर्तनों का अनुभव करेंगे। प्रातः काल का आधा घंटे का समय इन आसनों का अभ्यास करने के लिए पर्याप्त रहेगा।

इन आसनों के नियमित अभ्यास से आपके षरीर में न केवल स्फूर्ति बनी रहेगी अपितु आपके व्यक्तित्व में सकारात्मक परिवर्तन आएगा, जिससे आप स्वयं को अधिक ऊर्जावान महसूस करेंगे। आपके मन के नकारात्मक विचार, तनाव, अवसाद, क्रोध, चिड़चिड़ापन तथा अधीरता दूर होकर आप ज़्यादा अच्छे पाएंगे। जीवन को देखने का आपका नज़रिया बदल जाएगा। आपका दायित्वबोध तथा कार्यक्षमता बढ़ेगी। आप अधिक प्रसन्न, संतुश्ट और सहज बन पाएंगे। यद्यपि ये अभ्यास करने में बहुत सरल हैं फ़िर भी आप किसी प्रषिक्षित योगाचार्य के निर्देषन में इन्हें सीख सकते हैं। यदि आप मोटापा, मधुमेह से ग्रस्त हैं तो चिकित्सक से अपने लिए एक तालिका बनाकर आपको उसके अनुसार योग का अभ्यास करना चाहिए।

बदलाव आवष्यक

इन आसनों का नियमित अभ्यास करने के साथ-साथ आपको अपने खाने-पीने व रहन-सहन की आदतों को भी थोड़ा बदलना होगा। भोजन यथासंभव सादा हो जिसमें हरी सब्ज़ियांे, सलाद और फलों की प्रमुखता हो। खाने का समय निष्चित रखते हुए खाने में कम से कम 20 मिनट का समय लगाएं। मौन रहकर भोजन करना सबसे अच्छा है। खाते समय सेलफ़ोन, लैपटाॅप, वीडियो, टीवी आदि का उपयोग न करें। व्यसन वाली चीज़ों जैसे चाय, काफ़ी, एल्कोहल, तम्बाकू आदि का उपयोग कम करें अथवा न करें तो उचित होगा। प्रकृति के पांच तत्त्वों मिट्टी, पानी, धूप, हवा एवं आकाष से अपना समन्वय बनाए रखें। नियमित योगाभ्यास करने के साथ-साथ सप्ताह में एक दिन उपवास या फलाहार पर रहने की आदत डालें। दिनभर में कम से कम 10 से 12 गिलास पानी पीएं। 

नीबू पानी, षहदयुक्त पानी तथा मौसम के फलों का अधिक से अधिक इस्तेमाल करें। इससे आपके षरीर को स्फूर्ति मिलेगी तथा मन को षांत व संतुलित रख पाना संभव होगा। योग एक जीवन षैली है। इसे आज से ही अपनी दिनचर्या का अंग बनाएं। आप जिस दिन योगाभ्यास न करें उस दिन आपको ऐसा महसूस होना चाहिए कि आज कुछ खो गया है।लेखक आयुश मंत्रालय में सहायक निदेषक पद पर कार्यरत हैंयोग को लोकप्रिय बनाने के लिए भारत के अनेक स्थानों पर योग महोत्सव होते हैं। ऋशिकेष व पांडिचेरी में हर साल उत्सव मनाए जाते हैं, जिनमें विदेषी भी आते हैं अनेक लाभसर्वसाधारण को योग का लाभ कैसे मिले तथा इससे मिलने वाले आनंद से जीवन को किस प्रकार से उत्कृश्ट बनाया जाए, इन योग महोत्सवों में इसी पर चर्चाओं के विभिन्न सत्र आयोजित होते हैं