Tuesday, August 11, 2020

Career in Law Sector


 नई अर्थव्यवस्था ने जहां रोजगार के कई नए अवसर पैदा किए हैं वहीं पुराने प्रोफेशन में भारी बदलाव भी हुआ है। नए स्वरूप में विकसित होते इन क्षेत्रों में वकालत भी एक है। अब वकालत का प्रोफेशन काले गाउन और कोर्ट रूम तक सीमित नहीं रहा। बड़े-बड़े संस्थानों में लॉयर्स ने लॉ एक्जीक्यूटिव, लॉ आफीसर, लॉ काउंसलर तथा कंसल्टेंट का स्थान ले लिया है। 

टैक्सेशन, कारपोरेट, इंटेलेक्चुअल प्रापर्टी राइट जैसे कई आर्थिक उपयोगिता के क्षेत्रों में आज अलग कानून बन गए हैं। इन सभी में कानूनविदों की भूमिका बढ़ रही है। देखा जाए तो वकालत का पेशा आज एक नए रूप में उभर रहा है। कानून का अध्ययन करने वालों के लिए लॉ फर्म तथा कारपोरेट घरानों में बेहतर अवसर उपलब्ध हैं। वकालत एक्जीक्यूटिव जॉब की श्रेणी में शामिल हो गया है। आइए लेते हैं नई ऊंचाईयों को छूते इस फील्ड का एक जायजा

विषय की प्रकृति कानून के अध्ययन में सैद्धांतिकता और व्यावहारिकता भी है। न्यायालय के सभी निर्णय कानून की किताबों में वर्णित नियमों पर आधारित होते हैं, लेकिन कोर्ट रूम में सत्य और तथ्य की प्रस्तुति के लिए जिरह और तर्क सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। इस विषय के तहत छात्रों को संविधान की धाराओं के साथ सीपीसी, आईपीसी, कारपोरेट कानून, टैक्स कानून, रियल स्टेट लॉ, श्रम कानून और अंतर्राष्ट्रीय कानून का विस्तृत अध्ययन कराया जाता है।

इसके अलावा विभिन्न कानूनी कागजात तैयार करना, विभिन्न अदालती पत्रों की ड्राफ्टिंग आदि का अभ्यास भी करना होता है। कानून की शब्दावली का परिचय तथा प्रयोग भी इस विषय के अध्ययन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पहली बार काउंसिल में रजिस्ट्रेशन के लिए पाठयक्रम समाप्ति के बाद छात्रों को किसी वरिष्ठ वकील के अधीन एक वर्ष का इंटर्नशिप  करना पड़ता था। अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा यह प्रावधान समाप्त कर दिया गया है। छात्र पाठयक्रम के बाद सीधे बार काउंसिल में लॉ प्रैक्टिशनर के रूप में रजिस्टर हो सकते हैं।

पाठयक्रम 
भारत में लॉ की प्रारंभिक पढ़ाई के लिए मुख्यत: दो पाठयक्रम हैं- तीन वर्षीय एलएलबी तथा पांच वर्षीय इंटिग्रेटेड एलएलबी। इन दोनों ही पाठयक्रमों से लॉ ग्रेजुएट की डिग्री मिलती है। तीन वर्षीय एलएलबी पाठयक्रम में प्रवेश के लिए अभ्यर्थी को स्नातक होना चाहिए। देश के अधिकतर विश्वविद्यालयों में यह पाठयक्रम संचालित किया जा रहा है। इसके अलावा कुछ मान्यता प्राप्त निजी संस्थान भी यह कोर्स चला रहे हैं। पांच वर्षीय एलएलबी की पढ़ाई कुछ चुने हुए संस्थानों में होती है। इसमें नेशनल लॉ स्कूल आफ इंडिया, बंगलूर प्रमुख हैं। कुछ विश्वविद्यालयों ने भी इस कोर्स की शुरुआत की है। इसमें प्रवेश के लिए योग्यता 10+2 है। अध्यापन के क्षेत्र में रुचि रखने वाले छात्र एलएलबी के बाद एलएलएम भी कर सकते हैं। इस विषय में नेट तथा पीएचडी का भी विकल्प खुला है।

कुछ संस्थानों में एक वर्षीय डिप्लोमा तथा पीजी डिप्लोमा कोर्स भी चलाया जा रहा है। ये पाठयक्रम लॉ के किसी क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल करने के लिए हैं। डिप्लोमा पाठयक्रम के लिए न्यूनतम शैक्षिक योग्यता स्नातक है जबकि पीजी डिप्लोमा में प्रवेश के लिए एलएलबी होना चाहिए। नालसर यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ, हैदराबाद में पेटेंट लॉ, मीडिया लॉ, इनवायरमेंट लॉ तथा इंटरनेशनल ह्यूमनेटेरियन लॉ में पीजी डिप्लोमा पाठयक्रम उपलब्ध हैं।

संभावनाएं 
आज वकालत कोई लीक से बंधा काम नहीं रह गया है। पहले सालो-साल कोर्ट में बहस के आधार पर अपनी साख बनाओ, उसके बाद प्रैक्टिस जमने पर थोड़ा चैन और आराम। आज लीगल प्रैक्टिस का भी कारपोरेटाइजेशन हो चुका है। कई लॉ फर्म कार्य कर रहे हैं जिनमें कम उम्र में ही आपको योग्यता दिखाने का मौका मिलता है। प्रैक्टिस के अलावा लीगल कंसलटेंट, कारपोरेट लीगल एडवाइजर, लॉ आफीसर आदि के रूप में नए अवसर सामने दिखते हैं। आजकल कानूनविद व्यापारिक नीति निर्माण में भी अहम भूमिका निभाते हैं। राष्ट्रीय एवं बहुराष्ट्रीय कंपनियों में इन्हें लीगल कंसलटेंट, लीगल एडवाइजर, सालिसिटर इत्यादि के रूप में नियुक्त किया जाता है। इसके अलावा विभिन्न सरकारी संगठनों तथा विभागों में भी लॉ आफीसर नियुक्त किए जाते हैं। आज इंटरनेट पर होने वाले अपराधों के कारण सरकार द्वारा साइबर कानून बनाए गए हैं। इस कारण यह क्षेत्र भी नए अवसर प्रदान कर रहा है। विधि स्नातकों के लिए न्यायिक सेवा भी एक बेहतर विकल्प हो सकता है। इस सेवा के माध्यम से जजों की नियुक्ति की जाती है। इसके अलावा आप किसी लॉ कॉलेज में प्रोफेसर के रूप में काम कर सकते हैं। इसके अलावा स्वतंत्र रूप से वकालत का विकल्प सदैव आपके सामने खुला होगा।

प्रमुख संस्थान

नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यृूनिवर्सिटी
 पोस्ट बैग- 7201, नगरभावी, बंगलूर-72 फोन: 0080-23213160 ई मेल- ragistrar@nls.ac.in
नालसर यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ
हैदराबाद,3-4-761, बरकतपुरा, हैदराबाद- 27, फोन : 27567955 ई-मेल: admission@nalsarunivla w.org
सिंबायोसिस लॉ कालेज
सेनापति वापट रोड, पूना- 04 फोन : 020- 5655114, 5651495
गुजरात नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी
ओल्ड निफ्ट कैंपस, ई-4, इलेक्ट्रॉनिक जोन, गांधी नगर, गुजरात फोन: 079- 23243296, 23243308
नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी
एनएच-65, नागैर रोड, मनडोर, जोधपुर-04, फोन: 0291-5121594
वेस्ट बंगाल नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ जूरिडिकल साइंस
एनयूजेए भवन, 12 एलबी ब्लॉक, सेक्टर-3, सॉल्ट लेक सिटी, कोलकाता- 700098, फोन: 033-23357379
इलाहाबाद यूनिवर्सिटी
इलाहाबाद- 211002 फोन : 0532- 2461157, 2461089 वेबसाइट : allduniv.edu
फैकल्टी ऑफ लॉ
बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी, वाराणसी फोन : 2307630, 2307631 वेबसाइट : www.bhu.ac.in
इंटीग्रटेड स्कूल आफ लॉ
अध्यात्मिक नगर, 28 माइल स्टोन, दिल्ली-लखनऊ नेशनल हाइवे, गाजियाबाद, यूपी-201009, फोन: 0120-2739455, ई-मेल: inman@del2.vsnl.net.in  वेबसाइट : www.inmantec.edu
मेवाड़ लॉ इंस्टीटयूट
सेक्टर- 4 सी, वसुंधरा, गाजियाबाद, फोन: 2883970-72 ई-मेल : mim@mimcs.com 
एमेटी लॉ स्कूल
एम-ब्लॉक, रोड न.-44, साकेत, नई दिल्ली- 110017
साऊथ गुजरात यूनिवर्सिटी
पो. बॉक्स-49, सूरत- 395007, गुजरात
फैकल्टी आफ लॉ
पूना यूनिवर्सिटी, पूना फोन : 25601261, 25601264 ई मेल : mhhirani@unipune. ernet.in

एक्जीक्युटिव की भूमिका में भी
आज वकालत के पेशे में कई महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए हैं। आजकल लॉ के विद्यार्थियों के लिए पै्रक्टिस के अलावा भी तमाम अवसर खुले हुए हैं। इस फील्ड में नए अवसरों के विषय में सीनियर एडवोकेट संजीव सब्बरवाल से बातचीत की गई। वह टाटा इंडिकाम तथा रिलायंस इन्फोकॉम के लीगल एडवाइजर हैं तथा स्वतंत्र रूप से भी मुकदमे लड़ते हैं। प्रस्तुत है इस 

बातचीत के मुख्य अंश;
वकालत के प्रोफेशन में किस तरह के बदलाव हुए हैं?
नई अर्थव्यवस्था में वकालत में कई परिवर्तन हुए हैं। आज वकील एक एक्जीक्युटिव की भूमिका में हैं। अर्थ और व्यापार से जुडे़ कई कानून अब पहले के मुकाबले अधिक प्रासंगिक हो गए हैं। नए वकील इनमें विशेषज्ञता हासिल कर रहे हैं। पहले जहां क्रिमिनल या सिविल केसेज में विशेषज्ञता होती थी वहीं आज कारपोरेट, टैक्स, पेटेंट इत्यादि क्षेत्रों में स्पेशलाइजेशन के अवसर खुले हैं। इन क्षेत्रों में आर्थिक सुरक्षा भी अधिक है। मोटी बात यह है कि पहले साख बनने के बाद ही वकील की कमाई की शुरुआत होती थी, लेकिन आज शुरुआत में बेहतर नौकरी के अवसर मौजूद हैं।

इस प्रोफेशन में सफल होने के लिए किन गुणों की जरूरत होती है?
सबसे पहले तो आपकी लोगों में रुचि होनी चाहिए। इसके बाद जरूरी है सोचने की तार्किक क्षमता। कानून तो एक ही है लेकिन उसकी विवेचना अपने मुवक्किल के पक्ष के अनुरूप करनी होती है। इसके लिए तार्किक क्षमता बेहद जरूरी है। इसके अलावा आपकी अभिव्यक्ति क्षमता भी अच्छी होनी चाहिए। लिखने और बोलने की कुशलता के बिना अच्छा वकील बनना असंभव है।

अंग्रेजी का कितना महत्व है?
हमारे लीगल सिस्टम में आज भी अंग्रेजी का बहुत प्रभाव है। निचली अदालतों में हिंदी या किसी स्थानीय भाषा में अपना पक्ष रखा जा सकता है लेकिन हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के लिए अंगे्रजी का अच्छा ज्ञान होना अनिवार्यता है। इन दोनों प्रकार के न्यायालयों में सभी काम अंग्रेजी में होते हैं। कारपोरेट जगत में तो अंग्रेजी एक तरह से आवश्यक ही है।

इस प्रोफेशन का भविष्य कैसा देखते हैं?
समाज में जैसे-जैसे जागरूकता बढ़ रही है, वैसे-वैसे इस प्रोफेशन के लोगों की मांग बढ़ रही है। लोग अपने अधिकारों के बारे में जागरूक हो रहे हैं और अपनी शिकायतों के साथ न्यायालय में जा रहे हैं। कोर्ट के बाहर होने वाले सेटलमेंट्स में भी वकीलों की अहम भूमिका होती है। इस कारण मैं कहूंगा कि भविष्य काफी अच्छा है। अच्छी योग्यता रखने वाले लोग काफी आगे बढ़ सकते हैं।