Thursday, October 15, 2020

7 उपाय ठंड से बच्चों और बुजुर्गों को बचाने के

 7 उपाय ठंड से बच्चों और बुजुर्गों को बचाने के

ठंड (Cold) से बचाव, 07 Tips to Stay Healthy During the Winter Season के उपाय लगभग सभी जानते है परन्तु कितने लोग इसपर अमल करते हैं यही बात फतेह की होती है।

गर्मी का मौसम समाप्त और कब मानसून आया और कब निकल गया इसका अनुमान मौसम वैज्ञानिक को भी नहीं हो सका । आखिर ऐसा होता क्यूँ है कि हमारे वैज्ञानिक मौसम अनुमान का अध्ययन नहीं कर पाते जिसके परिणाम स्वरूप लोग इससे ना तो बचाव ही कर पाते और ना ही इससे लाभ ही ले पाते ।

ऐसा भी नहीं कि हमारे मौसम वैज्ञानिक मौसम का ठीक से अनुमान नहीं लगा पाते । उनके अग्रीम अनुमान के ही कारण उड़ीसा एवं दक्षिण के कई ऐसे शहर जो तुफान के चपेट में आने वाले थे जिसके परिणामस्वरूप जानमाल की भारी क्षति का अनुमान लगाया गया था । सही समय पर सही कदम उठाने के परिणाम स्वरूप् ही कई लोगों की जान को बचाया जा सका । जरूरत इस बात की है कि आप आपदा से निपटने के आपके पास कितने उपाय, साजो-सामान एवं लोग किस प्रकार इससे वाकिफ है । सिर्फ सरकार के सतर्क व उपाय करने से इस पर विजय प्राप्त नहीं किया जा सकता। इसके बारे में लोगों में ज्यादा से ज्यादा जानकारी देने एवं एक दूसरे की जानकारी को शेयर करने से भी इसपर काबू पाया जा सकता है । वैसे यह सच्चाई है कि आपदा व प्राकृतिक आपदा से बच पाना सम्भव नहीं होता परन्तु अपने प्रयास, ठोस प्लान व सही मार्गदर्षन से इसके प्रभाव को कम किया जा सकता है।

बिहार, मध्यप्रदेष, महाराष्ट्र, राजस्थान आदि क्षेत्रों में ­­प्राकृतिक कहर को सभी ने दूरदर्षन पर देखा । किस प्रकार जनता, सरकार व कारगर उपाय सभी मूकदर्षक व असहाय साबित हुये जो लोगों के बचाव केवल पानी के कम होने के उपरान्त ही किया जा रहा है । प्रष्न यह है कि क्या हम प्राकृतिक आपदा को झेलने में सक्षम हैं? इसके लिये हमने किस प्रकार की तैयारी कर रखी है।

इस प्रान्त के लोग विवष व लाचार ही दिख रहे हैं । लोगबाग एक दूसरे की मदद को आगे जा रहे हैं । यही इस समय देखने में अच्छा लगता है कि इस बुरे समय में भी लोग एक दूसरे की मदद में सामने आ रहे हैं । संवेदना इतनी है कि जरूरतमंद लोगों की सहायता में कई गैर सरकारी संगठन सामने आ रही हैं और बढ़-चढ़कर एक दूसरे की मदद को सामने आ रहे हैं।

ऐसा नहीं कि वर्तमान समय में समस्या कम हो गई हैं । समस्या तो लगातार बनी हुयी हैं, कभी गर्मी से लोग परेषान, तो कभी वर्षा से, तो कभी वर्षा के कारण उत्पन्न बिमारियों (Disease) से आदि। समस्या का समाधान व उपाय ही हमें मजबूत बना सकता है क्योंकि इस तरह की सम्भावनाएँ व समस्याएँ हमेषा आती रहेंगी ।

वर्षा (Rain) के उपरान्त अब ठंड का मौसम (Weather) का आगमन हो चुका है । यह मौसम बच्चों वे बुढ़ों के लिये बड़ा ही जानलेवा होता है। इस मौसम में थोड़ी से लापरवाही जानलेवा साबित हो जाती है। इसी कारण इससे बचाव ( winter season diseases and precautions) के ठोस व कारगर उपाय होने चाहिये, हमारी मान्यताएँ हैं कि इसके प्रयोग से कुछ हदों तक इससे जनित समस्याओं को कम किया जा सकता है-

1)   सूर्य की रोषनी का भरपूर सेवन (Sun Light)

जितना हो सके व्यक्ति को सूर्य की रोषनी ग्रहण करनी चाहिये । प्रातःकाल में सूर्य उदय के उपरान्त ही घर से बाहर निकलना चाहिये व अपना नित्य क्रियाकर्म करना चाहिये ।

सूर्य की रोषनी एक प्रकार की दवा होती है जिसका सेवन बड़े व बुजुर्ग को आवष्यक होती है। सूर्य की रोषनी में विटामिन-डी उपस्थित होता है जो व्यक्ति के हड्डियों को कमजोर व रोगयुक्त बना देती है।

शरीर को धूप दिखाना आवष्यक तो होता ही है, इसके अलावा सूर्य की रोषनी अगर घर के कोने कोने तक पहुँचे तो घर में साकारात्क उर्जा का संचार होता है, लोग स्वस्थ रहते हैं और सूर्य की भांति प्रतापी होते हैं।

2)   किचन में उपस्थित मषाले का उपयोग (Spices)

हमारे किचन में उपस्थित कई ऐसे वस्तु होते हैं जिसके बारे में सम्पूर्ण जानकारी लोगों को नहीं होती । लोगों को जितना हो सके इसके बारे में जानकारी जुटानी चाहिये क्योंकि इसके प्रयोग से व्यक्ति स्वस्थ व निरोग होता है।

दालचिनी, इलायची, लौंग, कालीमिर्च, जीरा, हल्दी, लहसून, अदरख आदि ऐसे वस्तु हैं जिनकी जानकारी होने पर इसका सही इस्तेमाल से व्यक्ति डाक्टर से कोसो दूर होता है।

ठण्डे के समय में इसका प्रयोग सही मात्रा में बढ़ा देना चाहिये क्योंकि इसमें रोगों से लड़ने की शक्ति व रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित होता है। हमारे किचन विज्ञान इतना सफल है कि विदेषी इससे चिढ़ते हैं और आज के समय में इसके प्रयोग को दूर करने के कई सारे हतकण्डे अपनाये जा रहे हैं।

हमारी पद्धतियों का इस्तेमाल कर हमें ही कैंसर के रोगी बनाते जा रहे हैं और हम आसानी से बच्चों के जिद के आगे नतमस्तक होते चले जाते हैं। मैगी, चाउमिन, काठीरोल, पिज्जा, बर्गर आदि ऐसे फास्ट फूड आसानी से रोड पर बिकते नजर आते हैं जिनपर लोगों की भीड़ देखते ही बनती है ।

3)   दूध का सेवन व इससे बनने वाले पदार्थ (Milk & milk generated foods)

विषेषकर गाय का दूध व्यक्ति के लिये अमृत होता है। दूध तो दूध होता है परन्तु गाय का दूध सर्वाेत्तम माना गया है जिसे जन्म लेने वाले बच्चों को देने के लिये कहा जाता है।

दूध में उपलब्ध प्रोटीन, मिनरल्स व विटामिन से लोग स्वस्थ, तेजदिमाग व फुर्तिला होता है। बुजुर्गों में इनका सेवन अनिवार्य कहा गया है।

दूध से बना घी, पनीर, मट्ठा आदि का सेवन में अल्प मात्रा में किया जा सकता है जिससे शरीर स्वस्थ रहता है। कमजोर शरीर वाले को पनीर का सेवन के लिये कहा जाता है।

4)   मांसाहारी खाद्यपदार्थ का सेवन (Non- Vegitarian)

अण्डा, मांस विषेषकर मुर्गे का, मछली आदि का सेवन ठंड से बचने के लिये किया जा सकता है। जरूरी नहीं कि जो शाकाहारी हो उन्हें भी इसका सेवन करना अनिवार्य है । उनके लिये उपाय दूसरे भी हो सकते हैं, उनके लिये कई सारे ऐसी वस्तुएँ मार्केट में उपलब्ध होते हैं जिसका सेवन इसके बदले में किया जा सकता है।

ठंडे प्रदेषों में वहाँ के जीवन यापन का अध्ययन करने पर यह पता चलेगा कि कैसे वहाँ के लोग अपनी व बच्चों को ठंड से बचाते हैं और क्या-क्या उपाय करते हैं । वैसे तो हमारे कई ऐसे साथी हैं जो पहाड़ी क्षेत्र के रहने वाले हैं वहाँ के लोग मांस को लटकाकर कई दिनों तक इसका सेवन करते रहते हैं, कई लोग इस समय पीने वाले मदिरा का भी सेवन करते दिख जाते हैं।

4.1 शाकाहारी (Vegitarian)

शाकाहारी सामान्यतः शाक, सब्जी (Vegitable), दूध (Milk) व दही (Curd) आदि का सेवन की प्राथमिकता देते हैं तथा दुसरों को इसके लिये ­प्रेरित भी करते हैं । इस पथ पर चलने वाले व्यक्ति ज्यादातर शाक, सब्जी, दूध, दही, घी तथा पनीर का सेवन करते दिखते हैं ।

वैसे यह नहीं कहा जा सकता है कि मांस के बिना रहा नहीं जा सकता। व इनका सेवन अनिवार्य होता है, शाकाहारी में भी बहुत सारे ऐसे वस्तु व खाद्य पदार्थ होते हैं जिनका सेवन से शरीर में त्वरित भाव से ऊर्जा का संचार हो जाता है।

5,   ड्राई फ्रुट्स (Dry Fruits)

ठंड में इसका सेवन ज्यादा मात्रा में किया जाना चाहिये । यह बताना आवष्यक है कि जिन प्रदेषों में ठंड ज्यादा पड़ती है वहाँ का रहन-सहन, पहनावा-ओढ़ावा आदि का अध्ययन किया जाना चाहिये जिसके सहारे आप इनपर काबू पा सकते हैं।

ठंड प्रदेषों में भोज्य पदार्थ गर्म प्रदेषों की तुलना में भिन्न होते हैं और इनका प्रभाव भी अलग-अलग होता है यह नहीं कि ठंड प्रदेष में पाये जाने वाले खाद्य वस्तु गर्म प्रदेषों में उसी मौसम में आसानी से उपलब्ध हो जायेंगे । वैसे तो वहाँ की पैदावार नहीं हो सकते परन्तु ठंड प्रदेषों से मंगवाकर इसका सेवन किया जा सकता है किन्तु सचेत रहे, इनका ज्यादा सेवनभर मात्र से इससे हानि भी पहुँच सकती है।

वैसे ठंड प्रदेष के लोग छोआरा, अखरोट, सूखी सेव, खजूर आदि का सेवन बहुतायात करते हैं इन्हीं से शरीर में ठंड से बचने हेतु रोग-प्रतिरोधक क्षमता विकसित होती है।

6   पोषाक (Woolen cloths- overcoat, Sweater, Jacket etc)

ठंड का पोषाक गर्मियों से भिन्न होता है। ठंड प्रदेषों में भी इनकी पहनावा अलग-अलग होता है। जहाँ ज्यादा ठंड पड़ता है वहाँ की पोषाक सामान्य ठंड पड़ने वाले स्थान से अलग होता है।

रूस, अमेरिका के कुछ प्रान्त, कष्मीर आदि क्षेत्र के लोगों के अध्ययन करने के उपरान्ते आप देखेंगे कि इनकी पोषाक कम ठंड पड़ने वाले लोगों से भिन्न होता है। कष्मीर के लोग ओभर कोट पहनते हैं और कुछ अलाव के कण इसमें रखे रहते हैं। इनकी बनावट विषेष प्रकार की होती है जिससे लोग ठंड से अपनी बचाव कर सके ।

ठंड में जितना हो सके घर से कम निकलना चाहिये । सूर्योदय के उपरान्त सूर्य की धूप का सेवन करे तथा शाम होने के उपरान्ते अपने-अपने कमरों में चले जाना चाहिये ।

इस समय पैर में मोजा, हाथ में दस्ताने व सिर पर गर्म टोपी आदि का इस्तेमाल करना चाहिये और जितना सम्भव हो खाली पैर से आना-जाना नहीं करना चाहिये । ठण्डे पानी का सेवन भी एकदम बन्द कर देना चाहिये जिससे रक्तचान बन्द होने की खतरा को टाला जा सके।

7.   रात्री में सफर करने से बचना चाहिये (Night Travel)

वैसे तो यह मामूली मालूम होता है परन्तु इसको नजरअंदाज करने से कई सारी ऐसी घटना सामने आयी है जिससे व्यक्ति के प्राण तक चले गये हैं।

इस समय हाथ से वस्तु की पकड़ ढीली हो जाती है, आप ज्यादा देर तक किसी भी वस्तु को पकड़कर नहीं रह सकते, इस कारण जितना हो सके दिन में ही सफर करना चाहिये और अगर गाड़ी को दौड़कर पकड़ना हो तो इससे बचना चाहिये क्योंकि व्यक्ति का जीवन किसी के लिये बहुमूल्य होता है क्योंकि जब आप बाहर होते हैं तब उस वक्त आपके परिवार के लोग आपके आने का इंतजार कर रहे होते हैं । आपको उस समय इसका ध्यान रखना चाहिये और इसके उपरान्त ही कोई कार्यवाही करनी चाहिये ।

ठंड वैसे यह मौसम बहुत ही अच्छा होता है, जिन्हें खाने का शौक हो तो व्यक्ति इस समय कभी भी कुछ भी खा सकता है, अपनी रोज के खुराक से ज्यादा भी खा सकता है जो आसानी से पच सकता है। इस समय लोग दबाकर खाना खाते हैं क्योंकि इस समय कई सारी सब्जियाँ बाजार में उपलब्ध होती है जो सस्ती व सुरूचि होती है, जिसके सेवन मात्र से मन तृप्त हो जाता है।

ठंड का मौसम जितना अच्छा होता है उतना ही बुजुर्ग और बच्चों के लिये खतरनाक होता है। इस मौसम में हमारा कर्तव्य होता है कि जितना हो सके इन वर्ग के लोगों को अपनी निगरानी में रखा जाना चाहिये और इसके रहन-सहन, रख-रखाव, खान-पान पर विषेष ध्यान दिया जाना चाहिये । जहाँ तक हो, अलाव से दूर रखा जाना चाहिये क्योंकि अक्सर इन्हें जगह-जगह देखा जा सकता है।  अलाव से कई सारी ऐसी घटनायें सामने आयीं हैं जिनसे डर सा लगने लगा है । इसका करंट बिजली से भी खतरनाक होता है क्योंकि यह वहाँ के टिसू को जला देता है और किसी भी प्रकार का चांस नहीं छोड़ता जिससे व्यक्ति अपनी पहली वाली अवस्था में आ सके ।

उपरोक्त विन्दुओं के सम्बन्ध में यह हमारी राय ह,ै हो सकता है कि व्यक्ति के पास इससे भी कारगर उपाय उपलब्ध हों। अगर जिन व्यक्तियों के पासे इसके अलावा और कोई भी उपाय हों तो कृप्या अपना नाम, पता व जानकारी अवष्य शेयर करें क्योंकि जानकारी से ही किसी भी समस्या को दूर व उसके प्रभाव को कम किया जा सकता है।