Tuesday, June 23, 2020

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कोरोना वायरस के खिलाफ़ जंग

कोविड-19 के विरुद्ध वैष्विक स्तर पर जारी संघर्ष में भारत एक सक्रिय भूमिका निभा रहा है। इस दिषा मंे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने सार्क देषों के नेताओं से वीडियो काॅन्फ्रेंस करके इस महामारी के संबंध में चर्चा की। यह एक सार्थक एवं अहम कदम था। श्री मोदी के नेतृत्व में, भारत के विदेष मंत्रालय (एमईए) ने ऐसे अनेक कारगर कदम उठाए हैं जिससे यह सुनिष्चित होता है कि हम इस महामारी के खिलाफ़ जंग अवष्य जीतेंगे

भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने मार्च के मध्य में जब दक्षिण एषियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) के नेताओं से वीडियो काॅन्फ्रेंस करके नोवेल कोरोनावायरस (कोविड-19) से उत्पन्न चुनौतियों के बारे में चर्चा की, तभी से उन्होंने अंतरराश्ट्रीय कूटनीतिक क्षेत्र में अपनी प्रधानता साबित कर दी थी। इस महामारी के विरुद्ध जंग की दिषा में यह वीडियो काॅन्फ्रेंस न केवल सफल साबित हुई अपितु इससे एक परंपरा स्थापित हुई जिसके माध्यम से भविश्य में उच्च-स्तरीय राजनीतिक एवं कूटनीतिक संवाद किए जा सकेंगे।

प्रधानमंत्री श्री मोदी की इस पहल से एक बार फिर से सार्क देषों पर भारत की नेतृत्वपूर्ण छवि पुख्ता हुई। यह एक व्यावहारिक कूटनीतिक कदम था, जिससे नेपाल, भूटान, बांग्लादेष, मालदीव, श्रीलंका एवं अफगानिस्तान की जनता को एक दूसरे से संपर्क बढ ़ाने और भारतीय संस्कृति को जानने का अवसर मिला। श्री मोदी के नेतृत्व में सार्क देष बाहरी एवं आंतरिक रूप से कोविड के विरुद्ध लड़ाई लड़ने में सक्षम हुए। मोदी जी के दिषा-निर्देषों में ये देष अपने यहां महामारी को फैलने से रोकने में काफी हद तक कामयाब रहे। इस दिषा में सार्क देषों के अधिकारीगण एक दूसरे के साथ सूचनाओं का आदान-प्रदान करने लगे। इनमें स्वास्थ्य संबंधित सूचनाएं प्रमुख थीं। इस महामारी के खिलाफ़ एक तरफा लड़ाई नहीं अपितु मिलकर लड़ने पर बल दिया गया। कोविड-19 जो नवंबर 2019 में चीन के वुहान षहर से फैला था, देखते ही देखते उसने समस्त विष्व को अपनी चपेट में ले लिया था। दुनिया के अनेक देष इसकी चंगुल में फंस गए और वहां पर संक्रमण, लोगों की मृत्यु और लाॅकडाउन के मामले लगातार बढ़ने लगे। विष्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने मार्च 2020 में कोविड-19 को महामारी घोषित कर दिया था।


नई दिल्ली में 20 मार्च को सेषेल्स के मंत्री बैरी फोरे और भारत के विदेष मंत्री डाॅ एस. जयषंकर एक दूसरे का हाथ जोड़कर अभिनंदन करते हुए। दोनों मंत्रियों ने अपने-अपने देषों में कोविड-19 की रोकथाम के लिए उठाए गए कदमों की चर्चा की

तुरंत उठाए कदम

इसके साथ-साथ भारत सरकार ने समय≤ पर अनेक ऐसे कदम उठाए जिनसे कोरोना को फैलने से रोकने में मदद मिली। इस महामारी के लक्षण पहचानने, किसी को होने तथा इसे फैलने से रोकने के कारगर उपाय किए गए। 13 मार्च से ही, भारत ने सभी वीज़ा को निरस्त कर दिया। 15 अप्रैल तक विभिन्न श्रेणियों में प्रतिबंध लगा दिए गए। एक सूचना भी जारी कर दी गई, जिसके तहत विदेषी यात्री को भारत आने की मनाही थी। विदेष के किसी भी हवाई अड्डे से भारत के किसी भी हवाई अड्डे पर विमानों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई थी। 22 मार्च को भारतीय समयानुसार 0001 बजे भारत की सीमाएं सील कर दी गईं। उसी दिन श्री मोदी ने 21 दिनों के लाॅकडाउन की घोशणा कर दी थी। बाद में इसे बढ ़ाकर 17 मई तक कर दिया गया। इसे अपनाने का मकसर कोरोना को फैलने की साइकिल को तोड़ना था। ऐसा करके ही लोगों को इसकी चपेट में आने से बचाया जा सकता था।

15 फरवरी के बाद जो भी लोग विदेषों से भारत आए, उनमें भारतीय भी षामिल थे, उन्हें 14 दिनों के लिए क्वारंेटाइन भेजा गया। श्री मोदी ने 19 मार्च को पहली बार देष की जनता से संवाद किया और एक दिन के लिए ‘जनता कफ्र्यू’ का आह्वान किया। बस उसके बाद से तो श्री मोदी निरंतर देष की जनता के संपर्क में रहे। वह लोगों को समझाते रहे कि किस प्रकार से हम कारगर कदम उठाकर एवं प्रभावषाली उपाय अपनाकर कोरोना को फैलने से रोक सकते हैं।

बहुपक्षीय पहल

इस बीच श्री मोदी ने सउदी अरब के राजा से भी संपर्क साधा, जो वर्तमान में जी-20 (यह 19 देषों और यूरोपीयन यूनियन का समूह है) के अध्यक्ष हैं। श्री मोदी ने वीडियो सम्मेलन के माध्यम से इन देषों के नेताओं से भी चर्चा की ताकि सभी मिलकर इस महामारी पर अंकुष लगा सकें। मार्च के अंत में हुए इस सम्मेलन में जी-20 इस बात पर सहमत हो गया कि वह विकासषील देषों से मूल एवं ब्याज की राषि कुछ समय के लिए टाल देगा। इस साल के अंत के पष्चात ही यह राषि वसूली जाएगी। विकासषील देषों पर इसका बोझ कम होगा और फिलहाल वे 20 बिलियन अमेरिकी डाॅलर देने से मुक्त हो गए। अब वे इस धन को स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च कर सकेंगे। अपनी जनता को कोरोना से बचाने में सफल हो सकेंगे। जी-20 देषों के वित्त, व्यापार, रोज़गार, पर्यटन एवं स्वास्थ्य मंत्री लगातार एक दूसरे के संपर्क में रहे।


भारत ने भारतीय वायु सेना के विषेश विमान द्वारा चीन के वुहान षहर के लिए अनेक सामान भेजा, नई दिल्ली के पालम स्थित भारतीय वायु सेना स्टेषन पर जाने के लिए तैयार क्रू सदस्य, चिकित्सकीय दल एवं सहयोगी सदस्
भारत ने अनेक दवाओं के निर्यात पर लगी रोक को भी हटाया। इसमें हाइड्रोआॅक्सीक्लोरोक्वीन और पेरासिटामोल प्रमुख थीं। इनका उपयोग कोविड-19 के मरीज़ों के उपचार के लिए उपयोग में लाई जाती हैं। ये दवाएं 100 से भी अधिक देषों को निर्यात की गईं। इनमें अमेरिका, रूस, स्पेन, ब्रिटेन, ब्राज़ील, जाॅर्डन, मिस्र, सार्क के सदस्य देषों, बंगाल की खाड़ी बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग उपक्रम (बिमस्टेक), जीसीसी, लेटिन अमेरिका एवं अफ्रीका प्रमुख हैं। यद्यपि श्री मोदी प्रतिदिन दुनिया के हर एक देष के प्रमुख से बातचीत करते। उनके अतिरिक्त उच्च-स्तरीय अधिकारियों की भी वार्तालाप हुआ करती है। भारत और रूस ने भी दवाओं की आवष्यकताओं पर विचार-विमर्ष किया। साथ ही तत्काल दवाओं की आपूर्ति भी की। दोनों देषों ने एक दूसरे को आवष्यक उपकरणों की आपूर्ति भी सुनिष्चित कराई जो कोविड-19 की रोकथाम के लिए ज़रूरी थे। चीन ने भी भारत को मदद देने के लिए धन्यवाद दिया। भारत ने कोरोना प्रभावित वुहान षहर के लिए 15 टन चिकित्सकीय सामान की आपूर्ति की। अप्रैल के महीने में भारतीय डाॅक्टरों और चिकित्सकीय विषेशज्ञों की एक टीम को कुवैत भेजा गया। श्री मोदी और कुवैत के प्रधानमंत्री महामहीम षेख सबाह अल-खालिद अल-हामद अल-सबाह ने टेलीफोन पर एक दूसरे से बातचीत भी की। भारत के विदेष मंत्री डाॅ एस. जयषंकर और कुवैत के विदेष मंत्री ने भी फोन पर वार्तालाप किया। दोनों नेताओं ने भविश्य में भी साथ मिलकर चुनौतियों का सामना करने और आपसी सहयोग बढ ़ाने की बात कही।


स्विट्ज़रलैंड के प्रतिश्ठित मैटरहाॅर्न पर्वत पर लेज़र लाइट द्वारा भारतीय राश्ट्रीय ध्वज तिरंगा उभारा गया। भारतीयों के लिए समर्थन एवं उनसे एकजुटता के लिए ज़ेरमाट में स्थित इस पर्वत के 1,000 मीटर से भी अधिक क्षेत्रफल पर तिरंगा उकेरा गया था

समाधान खोजने का प्रयास

भारत कोविड-19 के उपचार की दवा बनाने में दिन-रात जुटा हुआ है। इसके लिए वह अन्य देषों की मदद भी ले रहा है। 7 अप्रैल तक श्री मोदी ने जीसीसी (गल्फ़ कोआॅपरेषन काउंसिल) के साथ विस्तार पूर्वक विचार-विमर्ष भी किया था। सभी ने कोरोना पर काबू पाने के विशय पर चर्चा की। भारत लगातार जर्मन के साथ संपर्क में है। वह बहुपक्षवाद का गठबंधन मज़बूत करना चाहता है। इसकी नींव 2019 में जर्मनी ने रखी थी और अनेक देष इसके सदस्य हैं। 21 मार्च को भारत ने अमेरिका द्वारा आयोजित वीडियो काॅन्फ्रेंस में हिस्सा लिया। यह सात इंडो-पैसिफिक देषों - अमेरिका, आॅस्ट्रेलिया, जापान, दक्षिण कोरिया, वियतनाम एवं न्यूज़्ाीलैंड के अलावा भारत के उच्चाधिकारियों के बीच वार्ता के लिए रखी गई थी। सभी ने मिलकर मज़बूती के साथ इस महामारी के खिलाफ़ लड़ने की रणनीति तैयार की। सभी अधिकारी इस बात पर सहमत दिखे कि आपसी सहयोग एवं संपर्कता बढ ़ाकर अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने का कार्य किया जाए। ये आॅनलाइन बैठकें समय≤ पर बिना किसी बाधा के हो रही हैं।

भारतीय नागरिकों की चिंता

ईरान और इटली जो इस महामारी से सबसे पहले और सबसे अधिक प्रभावित हुए, वहां स्थित भारतीय दूतावास को भारत के नागरिकों की बहुत चिंता थी। वे निरंतर भारतीयों से संपर्क में थे और उन्हें जानकारी दे रहे थे कि वे महामारी से बचने के लिए कारगर उपाय अपनाएं। उन दोनों देषों में भारतीय चिकित्सकों की टीमें भेजी गईं जिन्होंने वहां जाकर भारतीयों की जांच-पड़ताल भी की कि कहीं वे कोरोना से पीड़ित तो नहीं हैं। वहां पर क्वारेंटाइन केंद्र भी बनाए गए। भारत के विदेष मंत्री 9 मार्च को श्रीनगर गए और वहां उन अभिभावकों से मिले जिनके बच्चे ईरान में पढ ़ रहे हैं। डाॅ जयषंकर ने उनकी परेषानियां सुनीं और उन्हें भरोसा दिलाया कि भारत सरकार उनकी सुरक्षा के लिए अवष्य कारगर कदम उठाएगी।

दुनिया भर के देषों में ऐसे अनेक भारतीय हैं जो नौकरी अथवा कारोबार कर रहे हैं। उनमें से कुछ इस महामारी के प्रकोप के बीच भारत लौटना चाहते थे। विभिन्न देषों में स्थित भारतीय दूतावास के अधिकारियों ने ऐसे भारतीयों से संपर्क साधा। जो भारतीय विदेषों में पढ ़ रहे थे अथवा काम कर रहे थे, उनकी परेषानियां सुनीं। उनकी समस्याएं दूर करने का भरोसा दिलाया।


भारत सरकार ने समझ लिया है कि कोरोना से उत्पन्न स्थिति से पार पाने के लिए पब्लिक-प्राइवेट-पीपल साझेदारी कारगर सिद्ध होगी। इसी दिषा में सरकार ने सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्रों में अनेक टेस्टिंग केंद्र स्थापित किए हैं। इन प्रयासों का सुखद परिणाम यह निकला कि समय रहते महामारी की रोकथाम हो सकी। पीड़ितों को समय पर उपचार मिला। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिशद द्वारा स्थापित मानक संचालन प्रक्रियाओं का उपयोग किया जा रहा है। भारत में कोरोना से लड़ने वाली यही प्रमुख संस्था है। जब तक महामारी का प्रकोप समाप्त नहीं हो जाता तब तक भारत का विदेष मंत्रालय विदेषों में रह रहे भारतीयों से संपर्क साधता रहेगा और उनकी हर एक ज़रूरत को पूरा करने के लिए तत्पर रहेगा। भारत कूटनीति के स्तर पर भी सार्क, बिमस्टेक एवं जी-20 देषों के साथ सहयोग बढ ़ाकर महामारी के प्रभाव को कम करने का प्रयास जारी रखेगा।