Tuesday, June 23, 2020

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ऐसे में जब देष कोविड-19 महामारी को फैलने से रोकने में संघर्षरत है, वहीं भारत सरकार वंदे भारत अभियान की योजना में व्यस्त है। यह एक ऐसा प्रत्यावर्तन अभ्यास है, जिसे सारी दुनिया महामारी के इस दौर में टकटकी लगाए देख रही है। पहले चरण में 7 मई को अबु धाबी से इस अभियान की षुरुआत की गई थी। पूर्व राजदूत अनिल वाधवा इस अभियान की प्रगति की जानकारी दे रहे हैं, जिसके तहत सड़क मार्ग, वायु मार्ग या समुद्री मार्ग से लोगों को उनके गंतव्य स्थल तक पहुंचाया गया

महामारी के संक्रमण को रोकने और कोविड-19 की कड़ी को तोड़ने के लिए भारत सरकार ने जबरन देषव्यापी लाॅकडाउन की घोशणा की थी। भारत में इसकी षुरुआत 24 मार्च से हुई थी। इस कारण से सरकार, उद्योगों, कारोबारी संस्थानों के कामकाज एवं रेल, विमान व बसों जैसी सार्वजनिक परिवहन सेवाएं ठप हो गई थीं। इससे 130 करोड़ की आबादी वाले देष के सामने ऐसा संकट उत्पन्न हो गया था, जैसा पहले कभी न हुआ। ऐसे 30 मिलियन भारतीय थे, जो विदेषों में या तो रहते थे, पढ ़ रहे थे अथवा कामकाज करते थे। ऐसे भी भारतीय थे, जो विदेषों में घूमने गए हुए थे या काम के सिलसिले में गए हुए थे। भारत समेत ऐसे अनेक देष थे, जहां पर विमान सेवाएं स्थगित कर दी गई थीं। इन देषों ने अपनी सीमाएं भी सील कर दी थीं। अनेक भारतीय अथवा प्रवासी भारतीय विदेषों में फंस गए थे। उन्हें वापस स्वदेष लाना भारत के विदेष मंत्रालय के लिए एक बड़ी चुनौती था। इसे जिम्मेदारी के साथ निभाने की आवष्यकता थी। इस कार्य के लिए अन्य मंत्रालयों जैसे विमानन तथा गृह मंत्रालय के साथ चर्चा की गई कि उन लोगों को किस प्रकार से सुरक्षित स्वदेष लाया जाए। इसके अलावा सरकार के सामने एक और समस्या थी कि भारत में फंसे 60,000 विदेषियों को कैसे उनके देष भेजा जाए। लगभग 70 देषों से यहां आए पर्यटक लाॅकडाउन में फंस गए थे। इन सभी को सुरक्षित तरीके से, उनके स्वास्थ्य देखते हुए, सुगम व आसानी से उनके संबंधित देष भेजना, वास्तव में बेहद कठिन कार्य था।

इन सभी की जिम्मेदारी भारत के गृह मंत्रालय पर आन पड़ी थी। उसने उत्साहपूर्वक इसे निभाने का बीड़ा उठाया। इस दिषा में 100 सदस्यों व अधिकारियों का एक विभाग भी बनाया, जिसे इस बहुत ही अहम काम को पूरा करना था। अतिरिक्त सचिव स्तर के अधिकारियों को इसमें षामिल किया गया था। वे राज्य सरकार के अधिकारियों के साथ संपर्क बनाकर विदेषी पर्यटकों की सूची बनाने का काम कर रहे थे। साथ ही, विदेषों में फंसे भारतीयों को स्वदेष लाने पर भी काम चल रहा था। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी स्वयं प्रत्यावर्तन के तौर-तरीकों पर नज़र रखे हुए थे। दूसरी ओर, भारत के विदेष मंत्री डाॅ. एस. जयषंकर भी सभी कार्यवाही पर विषेश ध्यान दे रहे थे ताकि इस काम में विलंब न हो प्रत्यावर्तन प्रयासों को कारगर बनाया जाए। विदेष सचिव हर्श वर्धन श्रृंगला इस संबंध में राज्य के मुख्य सचिवों से कई बार वीडियो काॅन्फ्रेंस किया करते थे, जिससे यह कार्य सुचारू


भारत के विदेष मंत्री डाॅ. एस. जयषंकर विदेषों में स्थित भारतीय मिषन के प्रमुखों से वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के माध्यम से वीबीएम की तैयारी की संपूर्ण जानकारी लेते हुए

चीन के वुहान, ईरान तथा जापान से तो फरवरी में ही भारतीयों को स्वदेष लाने का अहम कार्य कर लिया गया था। उस समय यह महामारी फैलनी आरंभ ही हुई थी। किंतु 7 मार्च से वंदे भारत मिषन (वीबीएम) का आरंभ किया गया। यह व्यापक स्तर पर चलाया गया अभियान था, जिसमें विदेषों में फंसे भारतीयों को सकुष स्वदेष लाने का काम किया गया। नागर विमानन मंत्री श्री हरदीप सिंह पुरी ने वीबीएम को ‘‘संभावना, सहयोग और सहर्श का अभियान’’ बताया। 25 जून तक 513047 भारतीय नागरिकों ने बताया कि वे सभी अपने-अपने घर पहुंच चुके हैं, जो दुनिया भर में लगभग 100 देषों में फंसे हुए थे। इनमें से अधिकतर छात्र, प्रोफेषनल थे, कुछ लघु-अवधि के वीज़ा पर विदेष गए हुए थे जैसे पर्यटक। ऐसे भारतीयों का नाम भी दर्ज किया गया जो जीसीसी (गल्फ़ सहयोग परिशद) के देषों में गए हुए थे, जिन्हें वीज़ा में छूट प्राप्त थी। भारत सरकार ने उन लोगों को स्वदेष लाने में प्राथमिकता दिखाई, जिनके पास वाजिब कारण थे। जैसे नौकरी छूटना, लघु-अवधि के वीज़ा समाप्त होना, स्वास्थ्य कारण, परिजन की मौत होना, छात्र, गर्भवती महिलाएं एवं वृद्ध।

संख्याओं से समझें

- वीबीएम के तहत तीन चरणों में लगभग 364,209 भारतीय 875 उड़ानों के माध्यम से स्वदेष लौटे।
- 7 मई से आरंभ वीबीएम का पहला चरण 16 मई तक चला, जिसमें 64 उड़ानों के माध्यम से दुनिया भर के 12 देषों से भारतीयों को स्वदेष लाया गया।
- 16 मई से अभियान का दूसरा चरण आरंभ हुआ जो 13 जून तक चला। इसमें 47 देषों से भारतीयों को स्वदेष लाया गया।
- अभियान का तीसरा चरण अभी तक जारी है। विभिन्न देषों से भारतीयों को लाने का काम किया जा रहा है।
- अभियान का चैथा चरण 3 जुलाई से आरंभ होगा और उसमें बड़ी संख्या में भारतीयों को विदेषों से सुरक्षित लाने का लक्ष्य रखा गया है।
- चार्टर्ड विमानों और जलपोतों के आवागमन के चक्कर और बढ ़ा दिए गए हैं ताकि अधिक से अधिक भारतीयों को स्वदेष लाया जा सके। 25 जून तक लगभग 130,061 भारतीयों को स्वदेष लाया गया है। - इसके अलावा समुद्र सेतु के तहत भी विदेषों में फंसे भारतीयों को स्वदेष लाने का कार्य किया गया। इसमें भारतीय नौसेना के जलपोत मालदीव, श्रीलंका और ईरान से भारतीयों को लेकर आए।

इस अभियान के पहले चरण में एयर इंडिया, एयर इंडिया एक्सप्रेस, एलायंस एयर ने संयुक्त रूप से कार्य किया। इस कार्य में भारतीय वायु सेना और नौ सेना की भी मदद ली गई। इस अभियान को समुद्र सेतु नाम दिया गया। विभिन्न जगहों पर कड़ाई का पालन, हवाई अड्डों पर सीमित सुविधाएं, सामाजिक दूरी का पालन इन सभी के बीच अभियान का पहला चरण हुआ। इसमें 64 उड़ानों और नौ सेना के जलपोतों के माध्यम से भारतीयों को स्वदेष लाया गया। लगभग 16,000 भारतीयों को जीसीसी, दक्षिण पूर्व एषिया, ब्रिटेन तथा अमेरिका से वापस लाया गया। अनेक विमानों को निर्धारित जगहों पर उतारना पड़ा क्योंकि राज्यों में प्रतिबंधित था। भारत के विदेष मंत्रालय ने इस मामले में विदषों में भारतीय राजनयिक मिषनों के साथ ही नहीं अपितु राज्य सरकारों के साथ भी संपर्क साध रखा था। ताकि सभी भारतीयों की वापसी सुनिष्चित हो सके।

आईएनएस जलाष्व कोलंबो में 700 भारतीयों को स्वदेष ले जाने के लिए तैयार खड़ा हुआ

वंदे भारत मिषन के दूसरे चरण का आरंभ 16 मई को हुआ। इसमें सीआईएस (स्वतंत्र राज्यों के राश्ट्रमंडल), यूरोप, रूस, अफ्रीका, आॅस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड और कनाडा से भारतीयों को स्वदेष लाया गया। एमईए ने एयर इंडिया व अन्य विमानन कंपनियांे के साथ सहयोग किया। भारतीयों को प्रमुख गंतव्यों जैसे अदीस अबाबा, एम्स्टरडैम, लंदन, फ्रैंकफर्ट एवं न्यूयाॅर्क से वापस लाया गया। इनके अलावा भी ऐसे अनेक देष थे जहां से भारतीयों को सुरक्षित स्वदेष लाने का कार्य किया गया। दक्षिण अमेरिका के सुदूर देषों जैसे अर्जेंटीना, पेरू तथा ग्वाटेमाला से भी भारतीयों को लाने का अहम काम किया गया।

दूसरे चरण के दौरान भारत ने गैर-अनुसूचित वाणिज्यिक, निजी तथा चार्टर्ड उड़ानें भी संचालित की थीं, जिसकी अनुमति नागर विमानन मंत्रालय ने दी थी। वहीं, जहाजरानी मंत्रालय ने जलपोतों की आवाजाही की अनुमति प्रदान की थी। लगभग 84,000 भारतीय नागरिक सड़क मार्ग द्वारा नेपाल, बांग्लादेष और भूटान से लौटे। भारतीय नौ सेना ने ईरान, श्री लंका और मालदीव से भारतीयों को सुरक्षित लाने का काम किया। भारत ने वीबीएम के तहत ब्रिटेन, अमेरिका और जर्मनी जैसे देषों के पर्यटकों को भी उनके देष पहुंचाने का काम किया। भारत ने समुद्रपारीय देषों में रहने वाले भारतीयों को भी इन उड़ानों के माध्यम से उनके संबंधित देषों तक पहुंचाया था। जब 25 मई को घरेलू उड़ानों का संचालन आरंभ हुआ, तब भी अनेक भारतीय एक राज्य से दूसरे राज्य अपने घरों को लौट सके थे। विदेष से आने वाली उड़ानें दिल्ली में उतरी थीं, न कि उनके गंतव्य स्थानों पर। यहां उतरने के बाद उन्हें 14 दिन का क्वारेंटाइन होना पड़ा, तब कहीं जाकर वे अपने घरों को पहुंचे।

इस अभियान का तीसरे चरण 12 जून को आरंभ हुआ और अब तक जारी है। इस चरण में निजी विमानन कंपनियों और उड़ानों की संख्या में बढ ़ोतरी हुई। लोगों को लाने की संख्या भी बढ़ी। भारतीय बड़ी संख्या में लौटने लगे और क्वारेंटाइन होने लगे। वंदे भारत अभियान में भारतीय दूतावास, उच्चायोग एवं विदेषों में स्थित वाणिज्य दूतावास ने बहुत अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने बड़ी लगन से काम किया। अनेक हेल्प लाइनों की व्यवस्था की, सोषल मीडिया पर सक्रियता निभाई। जिन-जिन देषों से ये भारतीय आ रहे थे, वहां के अधिकारियों से संपर्क साधा। भारतीय दूतावास ने अपना खास योगदान दिया। वे स्थानीय सरकारों के संपर्क में रहे। उन लोगों को वीज़ा के बिना किसी प्रकार की कठिनाई न हो और वे कानूनी झमेले में न फंसे इसका ध्यान रखा गया। उन्हें लघु-अवधि के वीज़ा जारी किए गए। इस अभियान में भारतीय गृह मंत्रालय और नागर विमानन मंत्रालय ने मिलकर उत्कृश्ट कार्य किया। जब तक यात्री अपने घरों को लौट नहीं गए आपस में संपर्क साधे रखा। अनेक भारतीयों ने विदेषों में भारतीय राजदूतों, वाणिज्य दूतों, वरिश्ठ अधिकारियों को इस अभियान की सफलता के लिए बधाई दी व धन्यवाद दिया, जो उन्हें हवाई अड्डे पर छोड़ने आए थे।

भारत ने हाल ही के समय में बड़े-स्तर पर लोगों को स्वदेष लाने का काम सफलतापूर्वक किया है। कुवैत से भारतीयों को लाया गया। अभियान राहत के तहत यमन से भारतीयों को स्वदेष लेकर आए। इराक व लीबिया से भी भारत के नागरिकों को सुरक्षित लाया गया। यद्धपि, वीबीएम और समुद्र सेतु अभियान सफलता पूर्वक संपन्न हुए, तब ये अभियान अब तक के सबसे बड़े अभियान बन गए हैं। कोविड-19 के समय भारत के ये अभियान समकालीन इतिहास में न केवल बड़े स्तर पर चलाए गए अपितु पूरी तरह से सफल रहे।