Tuesday, June 23, 2020

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भविश्य की ओर अग्रसर

अमेरिकी राष्ट्रपति डाॅनल्ड ट्रम्प की 24-25 फरवरी को की गई भारत यात्रा से दोनों देषों के आपसी संबंधों को मज़बूती मिली। पूर्व राजदूत अनिल वाधवा बता रहे हैं कि आखिर उनकी यात्रा इतनी महŸवपूर्ण क्यों है

अमेरिकी राश्ट्रपति डाॅनल्ड ट्रम्प 24 से 25 फरवरी, 2020 को भारत की यात्रा पर यहां आए थे। भारत की उनकी पहली यात्रा बेहद सफल रही। भारत यात्रा पर उनके साथ अमेरिका की प्रथम महिला यानी उनकी पत्नी मेलानिया ट्रम्प, उनकी पुत्री इवांका ट्रम्प, उनका दामाद जारेड कुषनर भी आए थे। अपनी यात्रा के दौरान वह अहमदाबाद, आगरा एवं नई दिल्ली गए। इन सबके बीच अहमदाबाद स्थित मोटेरा स्टेडियम में एक भव्य आयोजन रखा गया था। इसमें हज़ारों की संख्या में लोग एकत्रित हुए और उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राश्ट्रपति ट्रम्प का स्वागत किया। अपने भव्य स्वागत से ट्रम्प बहुत प्रभावित हुए थे। हज़ारों की संख्या में लोग हवाई अड्डे से लेकर स्टेडियम तक सड़क मार्ग पर पंक्तिबद्ध खड़े थे। यह दृष्य देखने में बहुत रमणीय था, जिसे देखकर ट्रम्प अभिभूत हो गए थे। गत आठ माह में श्री मोदी और ट्रम्प लगातार मिल चुके हैं, जिससे उनकी मित्रता और उनका गठजोड़ प्रगाढ ़ हो चुका है। इसलिए श्री मोदी को ट्रम्प ‘‘एक असाधारण’’ एवं ‘‘एक बेहद सफल नेता’’ कहकर पुकारते हैं।

गत कुछ वर्शों में भारत-अमेरिका के आपसी संबंधों में बेहद ऊंचाइयां देखने को मिल रही हैं। कारोबार, निवेष, रक्षा, आतंकवाद उन्मूलन, ऊर्जा, क्षेत्रीय एवं वैष्विक मुद्दे जैसे विशयों पर सहयोग बढ ़ाने के अलावा दोनों देषों के नागरिकों के बीच आपसी संपर्क बढ़ाने पर भी बल दिया गया है। दिसम्बर 2019 में भारत के विदेष एवं रक्षा मंत्री ने अमेरिकी यात्रा की थी। इस दौरान 2़2 मंत्रिस्तरीय संवाद का द्वितीय दौर सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर औद्योगिक सुरक्षा अनुबंध (आईएसए), रक्षा तकनीक एवं व्यापार पहल से संबंधित तीन करारों पर भी हस्ताक्षर किए गए। इसके तहत सुरक्षित तकनीक का हस्तांतरण एवं उन्नत तकनीकों का मिलकर निर्माण किया जाएगा। दोनों देषों ने रक्षा संबंधित सूचनाओं एवं सैन्य साजो-सामान को साझा करने की दिषा में भी समझौता किया है। इसके लिए लाॅजिस्टिक एक्सचेंज मेमोरेंडम आॅफ एग्रीमंेट (लिमोअ), कम्युनिकेषंस कम्पेटीबिलिटी एंड सिक्योरिटी एग्रीमेंट (कोम्कासा) नामक करार किए गए हैं। ट्रम्प की यात्रा के दौरान बेसिक एक्सचेंज एंड कोआॅपरेषन एग्रीमेंट (बेका) पर भी करार किया गया। भविश्य में इन समझौतों से दोनों देषों का गठजोड़ और सुदृढ ़ होगा।

साबरमती आश्रम में चरखा पर हाथ आज़माते अमेरिका के राश्ट्रपति ट्रम्प और उनकी पत्नी मेलानिया ट्रम्प। श्री मोदी उनकी सहायता कर रहे है

हालांकि भारत एक प्रमुख रक्षा साझेदार है। यहां पर अमेरिकी साजो-सामान बनाने के केंद्र स्थापित किए जाएं, इस दिषा में तकनीक का हस्तांतरण तथा मिलकर निर्माण पर बल दिया गया। भारत को एसटीए 1 (स्ट्रेटेगिक ट्रेड अथाॅरिसेषन) का दर्जा प्राप्त है। अब अमेरिकी आम्र्स एक्सपोर्ट कंट्रोल एक्ट में सुधार करने की बात कही जा रही है ताकि भारत को हथियारों की आपूर्ति की जा सके। भारत यह भी चाहता है कि उसे भारत एवं अमेरिका मंचों पर रखरखाव, मरम्मत एवं देखभाल (एमआरओ) की सुविधा भी मिले। यात्रा के केंद्र में कारोबार भी एक अहम बिंदु था। वर्श 2018 में अमेरिका ने दुनिया भर में स्टील एवं एल्युमीनियम की दरों पर 25 एवं 10 प्रतिषत की लेवी लगा दी थी। इससे भारत भी प्रभावित रहा। वहीं 5 जून, 2019 को अमेरिका ने भारतीय सामान पर लगी जीएसपी (प्राथमिकताओं की सामान्यकृत प्रणाली) हटा ली। इससे भारत के निर्यात पर 6.3 बिलियन का प्रभाव पड़ा। 16 जून, 2019 को भारत ने 28 अमेरिकी सामान पर अतिरिक्त लेवी लगा दी थी। अमेरिका ने सामान पर लगे करों को कम करने की बात कही और बाज़ार में चिकित्सकीय उपकरणों, सूचना एवं दूरसंचार तकनीकी यंत्रों जैसे स्मार्ट वाॅच, आईफोन, हार्ले डेविडसन मोटर साइकिलें, रोजमर्रा की चीज़ें जैसे बादाम, ब्लूबैरी, पीकैन नट्स, अखरोट को आपूर्ति बढ ़ाने पर बल दिया। भारत चाहता था कि उसे फिर से जीएसपी का दर्जा मिले, स्टील व एल्युमीनियम पर लगी लेवी हटाई जाए। अंगूरों एवं आम जैसे फलों का बाज़ार बढ़ाया जाए।

एच1 बी वीज़ा के तहत रोज़गार तथा कार्यों में दक्ष व विषेशज्ञों को काम के अवसर मिलें। इससे भारत के आईटी उद्योग पर प्रभाव पड़ा। वह लगातार इस बात पर ज़ोर दे रहा था कि अमेरिका की बढ ़ती अर्थव्यवस्था में भारतीय प्रोफेषनल की भागीदारी रहे। ट्रम्प की यात्रा के दौरान श्री मोदी ने इन मुद्दों को उठाया ताकि अमेरिका में काम करने वाले भारतीय प्रोफेषनल लाभांवित हो सके। गत दो वर्षों में दोनों देषों का आपसी व्यापार 2018 में 142 बिलियन डाॅलर तक जा बढ़ा। विषेषकर भारत द्वारा अमेरिका से ईंधन उत्पाद आयात कराया गया।

भारत के राश्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद ने नई दिल्ली स्थित राश्ट्रपति भवन में अमेरिका के राश्ट्रपति ट्रम्प से मुलाकात की
ट्रम्प से पहले अमेरिका के परमाणु ऊर्जा संस्थान का एक प्रतिनिधिमंडल पहले ही भारत आ चुका था। उसने भारत को आयात की जाने वाली परमाणु ऊर्जा के मुद्दे पर भी चर्चा की। न्यूक्लीयर पावर काॅर्पोरेषन आॅफ इंडिया लिमिटेड एवं अन्य सक्षम उपभोक्ताओं को अमेरिकी उत्पादांे की आपूर्ति करने पर विचार-विमर्ष किया गया।

इसके अंतर्गत छः वेस्टिंगहाउस न्यूक्लीयर रिएक्टर लगाने पर भी बातचीत की गई थी। गत चार वर्शों में दोनों देषों के बीच ऊर्जा कारोबार 20 बिलियन डाॅलर तक जा पहुंचा है। आने वाले समय में इस कारोबार को नया आयाम मिलेगा। यूएस इंटरनेषनल डेवेलपमेंट फाइनेंस काॅर्पोरेषन ने निर्णय लिया है कि भारत मंे स्थाई ठिकाने लगाए जाएं। उसने 600 मिलियन डाॅलर की योजनाओं को आरंभ करने का मन बनाया है। ये सभी योजनाएं देष में अक्षय ऊर्जा को बढ ़ावा देने से संबंधित होंगी। इन योजनाओं के आरंभ होने के बाद देष में वैकल्पिक ऊर्जा का उपयोग अपेक्षाकृत बढ़ेगा।

प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए ट्रम्प ने कहा कि दोनों पक्षों ने सुरक्षित 5जी वायरलेस तंत्र पर भी विचार-विमर्ष किया तथा ‘‘स्वतंत्रता, प्रगति एवं समृद्धि के लिए इस नई तकनीक की आवष्यकता एक टूल के रूप में होनी चाहिए न कि किसी चीज़ को अलग-थलग करने अथवा प्रतिबंधित करने के लिए।’’

अमेरिका के राश्ट्रपति ट्रम्प और उनकी पत्नी आगरा स्थित ताजमहल देखने गए

दोनों पक्ष इस बात पर सहमत दिखे कि उनके रिष्ते ‘‘व्यापक वैष्विक रणनीतिक साझेदारी’’ के स्तर पर पहुंच गए हैं। दोनों नेताओं ने संयुक्त बयान में कहा कि हम दोनों नेता ‘‘छù युद्ध के रूप में आतंकवाद एवं सीमा-पार आतंकवाद के हर एक रूप का विरोध करते हैं।’’ उन्होंने पाकिस्तान का नाम लेकर स्पश्ट कहा, ‘‘वह सुनिष्चित करे कि उसकी सरज़मीं से किसी भी प्रकार का आतंकवाद न पनपे। उसके नियंत्रण वाली जगह से आतंकी हमले न हों तथा 26/11, मुंबई तथा पठानकोट में आतंकी हमले के दोशियों के विरुद्ध उचित कार्रवाई की जाए।’’ दोनों पक्षों ने इस बात पर विषेश रूप से बल दिया कि उनके बीच मज़बूत संपर्कता स्थापित की जाए ताकि ‘‘क्षेत्रीय एकता और देषों की संप्रभुता बरकरार रहे, सुचारू प्रषासन प्राप्त हो, पारदर्षिता रहे एवं जिम्मेवारी सुनिष्चित की जाए।’’

संयुक्त बयान में कहा गया कि हिंद महासागर क्षेत्र में, भारत सुरक्षा प्रदान करने वाला एक नया माध्यम बन गया है। इसके अलावा इसके नेतृत्व में विकास एवं मानवीय सहायता के काम सुचारू रूप से संपन्न हो सकते हैं। दोनों पक्ष इस बात पर सहमत दिखे कि यूएसएड के लिए नई साझेदारी की जाए। इंडो-पेसिफिक क्षेत्र के लिए 400 मिलियन डाॅलर देने तथा तीसरी दुनिया के देषों में सहयोग के लिए भारत का विकासात्मक साझेदारी प्रषासन लागू करने की बात कही गई। दोनों देषों ने दक्षिण चीन समुद्र में सार्थक नियम लागू करने पर बल दिया गया। इस क्षेत्र मंे अंतरराश्ट्रीय निधि के तहत सभी देषों के हितों की बात हो। समुद्रीय मामलों के प्रति जगरूकता बढ ़ाने के कार्य में भारत, अमेरिका और अन्य सहयोगियों की मदद लेने पर विचार हुआ। अमेरिका ने कहा कि भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थाई सदस्यता मिले तथा परमाणु आपूर्ति समूह मंे प्रवेष मिले , इसके लिए वह अपना समर्थन देगा। भारत ने ‘‘ब्लू डाॅट नेटवर्क’’ में इच्छा जताई, जिसकी चर्चा ट्रम्प ने की थी। यह बीआरआई की भांति बहु-हितधारक पहल है। वैष्विक स्तर पर मूलभूत विकास के लिए सरकारों, निजी क्षेत्र तथा सिविल सोसाइटियों को एक मंच पर लाया जाएगा। इस यात्रा से दोनों पक्ष संतुष्ट दिखे। उन्होेंने उम्मीद जताई कि भविष्य में भारत और अमेरिका के बीच अनेक क्षेत्रों में मज़बत रिष्ते बनते देखने को मिलेंगे।