Tuesday, June 23, 2020

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भारत की प्रभावषाली विदेष नीति

गत एक दषक में, भारत की विदेष नीति में आषातीत कायाकल्प देखने को मिला। वैष्विक स्तर पर भारत की छवि एक परिपक्व देष के रूप में बन गई है, जो देष की राजनीतिक पहल को व्यापक एवं प्रभावी रूप से परिलक्षित कर रहा है

सार्थक, स्वीकार्य योग्य और सक्रिय। बेहद प्रभावषाली, स्वरूप प्रदाता, किसी से परहेज़ नहीं, व्यवधान उत्पन्न करने के बजाय समाधान निकालने वाली, सुरक्षा प्रदान करने वाली और दुनिया के लिए हितकारी; ये षब्द और सूचक भारत की विदेष नीति के बारे में अभिव्यक्त किए जा सकते हैं। ये विचार भारत के विदेष मंत्री डाॅ एस. जयषंकर ने हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित 5वें रायसीना संवाद में अभिव्यक्त किए थे।विदेष नीति में षब्दों का बहुत महŸव होता है। यही कारण है कि इन प्रभावषाली षब्दों के उपयोग से भारत की वर्तमान विदेष नीति अभिव्यक्त की जा सकती है। इनसे विदेष नीति में हुए बदलाव की झलक देखने को मिलती है। देषहित में यह विदेष नीति बिलकुल सटीक है। छोटे-बड़े सभी देषों से मेल-मिलाप की इच्छुक है। राजनीतिक संबंध बनाने के लिए सक्रिय है। 21वीं सदी में यही है भारत की विदेष नीति की विषेशताएं।

स्वरूप एवं स्थिरता प्रदाता

न्यू इंडिया 21वीं सदी के दूसरे दषक में उभरकर सामने आया है। यह अंतरराश्ट्रीय एजेंडे को स्वरूप प्रदान करने वाला है। जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद उन्मूलन, समुद्रीय सुरक्षा तथा वैष्विक प्रषासन की रूपरेखा तैयार करने जैसे ज्वलंत मुद्दों पर व्यापक रूप से विस्तारपूर्वक चर्चा करने में सक्षम एवं सबल है। रायसीना संवाद के दौरान भारत के प्रभाव पर व्यापक स्तर पर विचार-विमर्ष करते हुए विदेष मंत्री डाॅ एस. जयषंकर ने नए भारत की नई विदेष नीति के मुख्य बिंदुओं को गिनाया। ‘‘यह नीति व्यवधान उत्पन्न करने के बजाय स्वरूप प्रदान करने वाली अथवा निर्णायक है।’’ उन्होंने बताया कि भारत ने जलवायु परिवर्तन अथवा संपर्कता जैसे ज्वलंत मुद्दों पर अपने बेबाक विचार रखकर उपलब्धि हासिल की है। इससे भी महŸवपूर्ण बात यह है कि दुनिया में आने वाले वर्शों में भारत एक प्रमुख ताकत बनकर उभरेगा। 

‘‘भारत आनन-फानन में नहीं अपितु स्थाई रूप से दुनिया का षक्तिषाली राश्ट्र बनकर उभर रहा है। भारत की मंषा आत्म-कंेद्रित एवं व्यावसायिक हितों से संकीर्ण देष बनना नहीं है। वह तो ऐसा देष है जो दुनिया के हित में अंतरराश्ट्रीय तंत्र का उपयोग करना चाहता है।’’आपसी हितों को प्रमुखता देते हुए भारत ने अफ्रीका, एषिया, लेटिन अमेरिका एवं पूर्वी यूरोप के देषों को न केवल आर्थिक मदद दी है, बल्कि उन्हें तकनीक और विषेशज्ञता भी उपलब्ध कराई है। सहयोग की यह भावना राषि एवं अनुदान देने की प्रक्रिया के साथ-साथ, क्षमता निर्माण, प्रषिक्षण देने के रूप में भी परिलक्षित होती है। यह सहयोग षिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में प्रमुख है। दक्षिण-दक्षिण क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की भावना के तहत भारत ने 160 देषों को विकास योजनाओं के लिए 29 बिलियन अमेरिकी डाॅलर का ऋण देना तय किया है।


रायसीना संवाद 2020 के दौरान चर्चा में भाग लेते भारत के विदेष मंत्री डाॅ एस. जयषंकर

राजनीतिक पहुंच

वैष्विक स्तर पर भारत का प्रभाव काफी बढ़ गया है। राश्ट्रहित में भारत सरकार विभिन्न देषों से राजनीतिक संबंधों को सुदृढ़ करने में जुटी हुई है। इसका परिणाम यह देखने को मिल रहा है कि विदेषों के उच्च नेतागण भारत की यात्रा पर आ रहे हैं, और भारत के नेता विदेष जा रहे हैं, जिनमें राश्ट्रपति, प्रधानमंत्री, उप- राश्ट्रपति, विदेष मंत्री एवं अन्य मंत्री षामिल हैं। गत साढ़े पांच वर्शों में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ही 70 से अधिक देषों की यात्रा कर चुके हैं। बहुध्रुवीय विष्व में भारत ने बहु-संरेखण मार्ग चुना है। इसके तहत समान विचारों वाले देषों एवं प्रमुख केंद्रों से सहयोग बढ़ाकर वैष्विक मुद्दों को सुलझाया जा रहा है।

न्यू इंडिया के लिए कूटनीति 

देष के विकास के लिए यह ज़रूरी समझा जा रहा है कि दुनिया के सभी देषों से राजनैतिक संबंध स्थापित किए जाएं। भारत सरकार ने देष की अर्थव्यवस्था 5 ट्रिलियन अमेरिकी डाॅलर करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। वहीं प्रधानमंत्री श्री मोदी ने वादा किया है कि सभी मित्र देषों के साथ साझेदारी का तंत्र मज़बूत करके, भारत की स्वतंत्रता की 75वीं वर्शगांठ के अवसर पर 2022 तक ‘न्यू इंडिया’ बना लिया जाएगा। इसी दिषा में सरकार ने देष के कल्याण में अनेक महŸवाकांक्षी योजनाएं जैसे ‘मेक इन इंडिया,’ ‘स्मार्ट सिटी,’ ‘स्किल इंडिया’ एवं ‘स्टैंड-अप इंडिया’ चलाई हैं। इनके माध्यम से दूसरे देषों से राजनीतिक संबंध बनाने पर बल दिया गया है। तकनीकी, अन्वेशण एवं स्टार्ट-अप के माध्यम से साझेदारी बढ़ाने पर न्यू इंडिया का निर्माण संभव हो पाएगा। वैष्विक स्तर पर निस्संदेह भारत का रुतबा और बढ़ जाएगा।


रायसीना संवाद-2020 से इतर, भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी विभिन्न देषों के मंत्रियों के प्रतिनिधिमंडल के साथ
वैष्विक एजेंडे को मिला आकार

अब जब भारत का रुतबा वैष्विक स्तर पर बढ़ रहा है, ऐसी स्थिति में भविश्य की ओर देखते हुए, दुनिया भर के देषों की भारत से अपेक्षाएं बढ़ने लगी हैं। श्री मोदी ने एक नई विष्व व्यवस्था बनाने के लिए बहुपक्षवाद में सुधार की वकालत की है, जिससे स्पश्ट होता है कि 21वीं सदी में सŸाा एवं वास्तविकता का स्थानांतरण हो रहा है। जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर भारत ने नेतृत्व संभाल लिया है। पेरिस संधि के तहत वह कार्बन-उत्सर्जन कम करने एवं अक्षय ऊर्जा को अपनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इस क्षेत्र में नई दिल्ली के नेतृत्व को देखकर अनेक देष इस मुहिम के साथ जुड़ रहे हैं। क्लीन व ग्रीन विष्व के लिए वे अंतरराश्ट्रीय सोलर गठबंधन का हिस्सा बनकर ष्वेत आंदोलन को बढ़ाने में लगे हैं। भारत ने आपदा प्रतिरोधी संरचना के लिए गठबंधन नामक एक नई अंतरराश्ट्रीय पहल आरंभ की है, जिसे अनेक देषों का समर्थन प्राप्त हो रहा है।ण्

ब्रांड इंडिया

भविश्य का मार्ग प्रषस्त करते हुए, भारत की विदेष नीति में सांस्कृतिक कूटनीति एवं सभ्य समाज के मूल्यों को विषेश स्थान दिया गया है। भारत में सभी प्रमुख धर्म के लोग रहते हैं तथा यहां विभिन्न प्रकार की संस्कृतियां देखने को मिलती हैं। इस विचार के तहत दुनिया भारत को एक जीवंत बहुलतावादी समाज के रूप में देखती है। इस कारण से भी भारत के प्रति दुनिया की आकांक्षाएं बढ़ने लगी हैं। अन्य देषों का भारत के साथ सांस्कृतिक संपर्क बढ़ रहा है। दुनिया भर में अंतरराश्ट्रीय योग दिवस मनाया जा रहा है। यूनेस्को ने कुम्भ मेले को अमूर्त सांस्कृतिक विरासत घोशित किया गया है।

बीते वर्शों में रायसीना संवाद, वैष्विक एवं सामरिक मुद्दों पर प्रभावी चर्चा करने का एक सषक्त माध्यम बनकर उभरा है। इस मंच पर मुझे उन नेताओं से मिलने का अवसर मिलता है जो हमारे देष के अच्छे मित्रगण हैं।

नरेंद्र मोदी - भारत के प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री श्री मोदी ने रायसीना संवाद 2020 से इतर, ईरान के विदेष मंत्री डाॅ मोहम्मद जावेद ज़रीफ़ से भेंटवार्ता की

न्यू इंडिया के निर्माण में दुनिया के विभिन्न देषों तथा महाद्वीपों में रहने वाले भारतीय मूल के 25 मिलियन लोग अहम भूमिका निभा सकते हैं। डाॅ एस. जयषंकर ने कहा हैः ‘‘भारत इस दिषा में बढ ़ते हुए ब्रांड इंडिया बन सकता है। ब्रांड इंडिया का अर्थ है कि हम ताकतवर देष के रूप में स्थापित होंगे।’’ भारतीय मूल के लोग निस्संदेह भारतीय संस्कृति एवं विरासत के राजदूत साबित हो रहे हैं।प्रधानमंत्री श्री मोदी ने ब्रांड इंडिया का सार समझाया है। ‘‘हमारी सभी उपलब्धियां भारत की जनता पर केंद्रित हैं। जिन सपनों को पूरा करने के लिए हम जो प्रयास कर रहे हैं, समस्त विष्व यही करना चाहता है और हर एक देष अथवा समाज का भी यही सपना होता है,’’ श्री मोदी ने इस वर्श संयुक्त राश्ट्र महासभा में दिए गए अपने भाशण में यह बात कही।आगे की सोचते हुए, भारत जहां अपने दृश्टिकोण से दुनिया के अन्य देषों से आत्मीयता बढ ़ाने में जुटा हुआ है, ऐसे मंे वह देष की जनता के हित में स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने में सक्षम हो चुका है। देष की विदेष नीति में लोकतांत्रिक तरीके से अन्य देषों से संपर्क साधते हुए अपने नागरिकों के कल्याण को प्राथमिकता दी गई है। निस्संदेह इस प्रक्रिया के माध्यम से भारत विष्व के एक नए ताकतवर देष के रूप में उभर रहा है। एक ऐसा देष जिसकी आवाज़ हर कोई सुन रहा है और वैष्विक व्यवस्था में बदलाव दिख रहा है।