Saturday, August 22, 2020

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चेन्नई में चर्चा

मामल्लापुरम में भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति षी जिनपिंग के बीच हुए दूसरे अनौपचारिक भारत-चीन षिखर सम्मेलन में घटते कारोबार को बढ़ाने तथा आपसी विष्वास मज़बूत करने पर बल दिया गया। इस सम्मेलन से दोनों पड़ोसी देषों में आपसी सहयोग के नए दौर का आरंभ हुआ
तमिलनाडु में चेन्नई के बाहरी इलाके में समुद्र के किनारे पर स्थित मंदिरों के कस्बे मामल्लापुरम (महाबलीपुरम) में सातवीं सदी में चट्टान को काटकर बनाए गए स्मारक एवं मूर्तियां पृश्ठभूमि में दिखाई दे रही थीं। उसके समक्ष भारत एवं चीन के नेता नारियल पानी पीते हुए दोनों देषों के द्विपक्षीय संबंधों के नए दौर के आरंभ होने की आषा जता रहे थे। आपसी सहयोग एवं विष्वास को बढ़ाने पर चर्चा कर रहे थे। उन्होंने एक दूसरे के हितों एवं अपेक्षाओं का विषेश ध्यान रखने की बात कही। भारत के प्रधानमंत्री श्री मोदी एवं चीन के राश्ट्रपति षी जिनपिंग के बीच आत्मीयता के भाव देखने को मिल रहे थे। श्री मोदी ने यूनेस्को द्वारा घोशित विष्व धरोहर स्थल मामल्लापुरम पर चीन के राश्ट्रपति के सम्मान में बैठक रखी और उन्हें इस ऐतिहासिक कस्बे के दर्षन कराए। उसके बाद दोनों नेताओं ने बेहद सुंदर दिखने वाले षोर मंदिर पर रात्रिभोज किया।


तमिलनाडु के कोवलम में स्थित एक रिज़ाॅर्ट में हथकरघा एवं हस्तषिल्प पर आयोजित प्रदर्षनी देखने दोनों नेतागण पहुंचे

दूसरे अनौपचारिक भारत-चीन षिखर सम्मेलन के पहले दिन 11 अक्टूबर, 2019 को श्री मोदी एवं चीन के राश्ट्रपति ने कई घंटे साथ बिताए। देष के विकास एवं पुनरुत्थान के लिए दोनों नेताओं ने एक दूसरे को अपने-अपने दृश्टिकोण से अवगत कराया। उनकी बातचीत इस पर भी आधारित थी कि 2022 तक श्री मोदी नया भारत किस प्रकार से बनाएंगे। उस समय भारत अपनी स्वतंत्रता की 75वीं वर्शगांठ मनाएगा। वहीं षी जिनपिंग के चीन का सपना है कि एषिया के इन दोनों पड़ोसी देषों के बीच आपसी सहयोग बढ़ाया जाए। इससे दोनों ही देष लाभांवित होंगे। दोनों नेताओं के बीच हुए इस अनौपचारिक सम्मेलन ने 12 अक्टूबर को व्यापक स्तर पर होने वाली प्रतिनिधिमंडल-स्तरीय वार्ता को सषक्त मंच प्रदान किया। दोनों नेताओं ने विस्तारपूर्वक इस बात पर विचार-विमर्ष किया कि आख़िर किस प्रकार से भारत-चीन के आपसी संबंधों को सुदृढ़ किया जाए। प्रमुख अंतरराश्ट्रीय एवं क्षेत्रीय मुद्दों को मित्रवत् माहौल में किस प्रकार से सुलझाया जाए।


दोनों नेतागण भगवान कृश्ण के मक्खन लड्डू के समक्ष खड़े हुए। यह विषाल चट्टान बिना किसी सहारे के ढलाऊ पहाड़ी पर टिकी हुई है
चेन्नई में हुई दो दिवसीय चर्चा ने वुहान में हुई वार्ता (पहला अनौपचारिक भारत-चीन षिखर सम्मेलन चीन के वुहान षहर में अप्रैल 2018 को हुआ था) की भावना को ही प्रसारित किया। इसमें मतभेदों को विवेकपूर्ण तरीके से प्रबंधित करने, सहयोग को आर्थिक, सामयिक एवं संस्कृति जैसे क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर बढ़ाने पर बल दिया गया।

कारोबार बढ़ाने पर बल

इस सम्मेलन की सबसे बड़ी विषेशता यह रही कि इसमें उच्च-स्तरीय आर्थिक एवं कारोबार संवाद तंत्र-प्रणाली स्थापित करने का निर्णय लिया गया। ताकि दोनों देषों के बीच होने वाला कारोबार घाटा कम किया जा सके। सामान का व्यापार बढ़े, सेवाओं तथा निवेष में वृद्धि हो सके। इस तंत्र-प्रणाली की अध्यक्षता भारत की विŸा मंत्री निर्मला सीतारमण एवं चीन के उप-राश्ट्रपति हू चुनहुआ करेंगे। अगर चीन अपना वादा निभाता है और भारतीय दवा कंपनियों एवं आईटी सेवाओं के लिए अपने बाज़ार खोलता है तब ऐसी स्थिति में यह तंत्र-प्रणाली निस्संदेह दोनों देषों के आर्थिक परिदृष्य को परिवर्तित करने का कार्य करेगी। भारत इस प्रणाली की मदद से चीन के साथ होने वाला अपना कारोबार घाटा 50 बिलियन डाॅलर तक कम करने में सफल होगा। भारतीय कंपनियों को चीन के बाज़ार में अपने पैर जमाने का सुअवसर प्राप्त होगा। दोनों देष इस बात पर भी सहमत दिखे कि एक दूसरे के यहां निवेष बढ़ाया जाए।


षिखर सम्मेलन की समाप्ति पर श्री मोदी ने चीन के राश्ट्रपति को हस्तनिर्मित एक बड़ी रेषमी षाॅल भेंट दी। इस लाल रंग की षाॅल पर सोने की ज़री से षी जिनपिंग का चित्र उकेरा गया था। इसका निर्माण कोयम्बटूर आधारित सोसाइटी के बुनकरों द्वारा किया गया था।
यह निवेष पहचान के क्षेत्रों में उत्पादन साझेदारी की मदद से बढ़ाने पर ज़ोर दिया गया। तंत्र-प्रणाली की पहली बैठक में इसकी रूपरेखा तैयार की जाएगी।


इसके बदले में चीन के राश्ट्रपति ने श्री मोदी को चीनी मिट्टी से बना स्मृति चिह्न भेंट किया, जिस पर मोदी का चित्र उकेरा गया था

सामयिक विष्वास

दूसरे अनौपचारिक षिखर सम्मेलन की एक अन्य विषेशता यह रही कि रणनीतिक संचार को गहरा एवं समेकित करने की बात कही गई। इसका लाभ यह होगा कि दोनों देषों के बीच विष्वास और मज़बूत होगा। भारत-चीन आपसी हितों को कारगर रूप से साध सकेंगे। इस संदर्भ में, दोनों देष सुरक्षा एवं आपसी सेनाओं में सहयोग बढ़ाने पर सहमत हो गए। दोनों देषों के नेताओं ने इस मुद्दे पर भी सहमति जताई कि वे मिलकर कट्टरवाद और आतंकवाद के विरुद्ध अपनी जंग जारी रखेंगे। एषिया की दो उभरती षक्तियों ने दूरदर्षिता का परिचय देते हुए कहा कि वे वैष्विक स्तर पर भी अपनी साझेदारी को मज़बूती प्रदान करेंगे।


भारत के प्रधानमंत्री श्री मोदी एवं चीन के राश्ट्रपति मामल्लापुरम में पंचरथ परिसर में गहन विचार-विमर्ष करते हुए। इस परिसर में अखंड चट्टानों को काटकर बनाए गए मंदिर देखने में रथ के समान लगते हैं
क्राॅस-कटिंग मुद्दों, जलवायु परिवर्तन एवं सतत् विकास पर भी वे एक दूसरा को पूर्ण सहयोग देते रहेंगे। संरक्षवाद की लगातार ऊंची होती दीवारों के बीच, दोनों देषों ने निर्णय लिया कि वे ‘‘नियम-आधारित बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली को मज़बूत करेंगे’’ तथा मिलकर ऐसे काम करेंगे जिससे सभी देष लाभांवित हो सकें।

सांस्कृतिक संबंध

वुहान सम्मेलन में तय किया गया था कि भारत-चीन में उच्च स्तरीय बैठकें होंगी। एक दूसरे के नागरिकों को मेल-मिलाप का अवसर मिलेगा। दोनों देषों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान तंत्र का गठन किया जाएगा। वहीं चेन्नई षिखर सम्मेलन में इन मुद्दों को तेज़ी मिली। दोनों देषों के नेताओं ने सहमति जताई कि भारत-चीन के लोगों को एक दूसरे से मिलने के अधिक से अधिक अवसर प्रदान किए जाने चाहिएं। इस दिषा में दोनों देषों के राजनीतिक संबंधों की 70वीं वर्शगांठ के अवसर पर 35 कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। भारत के विदेष मंत्रालय द्वारा जारी संदेष में कहा गया, ‘‘दोनों देषों के नेताओं ने निर्णय लिया कि वर्श 2020 को भारत-चीन संबंधों तथा एक दूसरे के नागरिकों को आपस में मिलने के अवसर प्रदान करने के लिए समर्पित किया जाएगा। जैसा कि 2020 में भारत-चीन के आपसी संबंधों की 70वीं वर्शगांठ मनाई जा रही है, ऐसे में आदान-प्रदान के अनेक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें नेतागण, राजनीतिक पार्टियों के अधिकारी, सांस्कृतिक व युवा संगठनों और सैनिकों को एक दूसरे से मेल-जोल बढ़ाने के अवसर प्रदान किए जाएंगे।’’


सांस्कृतिक कार्यक्रम के बाद स्थानीय कलाकारों के साथ फोटो खिंचवाते श्री मोदी और षी जिनपिंग
अन्य विशयों पर विचार-विमर्ष

दोनों देषों के नेतागण इस बात का महŸव जताया कि भारत-चीन के बीच सांस्कृति समझ को बढ़ावा देने की दिषा में वहां के नागरिकों को मेल-जोल के अवसर मिलने चाहिएं।

दोनों नेता इस बात पर सहमत दिखे कि विष्व के अन्य भागों की संस्कृति एवं सभ्यता को समझने के लिए दोनों देषों को मिलकर काम करने की आवष्यकता है।

दोनों नेताओं ने सीमा से अन्य संबंधित मुद्दों के अलावा विभिन्न विशयों पर अपने विचारों का आदान-प्रदान किया। उन्होंने विषेश प्रतिनिधियों द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना की। साथ ही कहा कि वे अपने प्रयास जारी रखें जिससे निश्पक्ष, उचित एवं पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समझौते की रूपरेखा तैयार हो सके