Friday, September 25, 2020

संकट से उबरने आईडीबीआई सरकार की शरण में जाएगी

संकट से उबरने आईडीबीआई सरकार की शरण में जाएगी

6500 करोड़ रुपए के असेट लाएबिलिटी मिसमैच के संकट का सामना कर रहा आईडीबीआई जल्द ही सरकार को कम से कम तीन हजार करोड़ रुपए का रीकैपिटलाइजेशन जारी करने का आग्रह करने वाला है ताकि इस संकट पर काबू पाया जा सके। आईडीबीआई के चेयरमैन पीपी वोरा बुधवार को अपनी मांगें नए सिरे से रखने हेतु इकोनॉमिक अफेयर्स के सचिव सी.एम. वासुदेव से मिलने वाले हैं। वित्त मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि आईडीबीआई को लगभग 5500 करोड़ रुपए की आवश्यकता है।

इनमें ंसे 3000 करोड़ रुपए कैपिटल एडी०वेसी संबंधी जरूरतों को पूरा करने हेतु, 2200 करोड़ रुपए बॉण्ड होल्डर्स को री-पे करने हेतु तथा शेष राशि की जरूरत आईएफसीआई को बेल-आउट करने में पड़ेगी। आईडीबीआई की वर्ष 2000-01 की बैलेंस शीट के अनुसार इस वित्त वर्ष में एफआई के टोटल असेट्स 24,643 करोड़ रुपए के हो गए हैं जबकि लाएबिलिटीज 31,381 करोड़ रुपए तक जा पहुंची है। परिणामस्वरूप इस वित्त वर्ष में 6700 करोड़ रुपए का मिसमैच पैदा हो गया है। यह मिसमैच तब किसी हद तक कम हो जाएगा जब एक बार एफआई एक हजार करोड़ रुपए मॉप-अप के टारगेट के साथ बॉण्ड्स मार्केट को टेप कर देगा, लेकिन सूत्रों ने कहा है कि आईडीबीआई को टै०स बैनिफिट्स हासिल करने के लिए सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरे०ट टै०सेस की मंजूरी लेना बाकी है।

हालांकि सेबी इसके अंब्रेला बॉण्ड्स के प्रस्ताव के लिए अनुमति दे चुका है। बॉण्ड इश्यू के बावजूद आईडीबीआई के सामने 5500 करोड़ रुपए के मिसमैच का संकट बना हुआ है जिसके लिए एफआई को तीन हजार करोड़ रुपए के लिए अपने रिजव्र्स में हाथ डालना पड़ेगा। इसके कैपिटल एडी०वेसी रेशो को आरबीआई द्वारा तय सीमा से नीचे रखने में मदद मिलेगी। ऐसा माना जा रहा है कि आईडीबीआई ने एमओएफ की अगली बैठक में पेश किए जाने वाले अनेक विकल्पों की योजना तैयार कर ली है। सूत्रों ने बताया कि बजटरी सपोर्ट के जरिये केन्द्र सरकार से रीकैप के रूप में तीन हजार करोड़ रुपए हासिल करना इन विकल्पों में से एक है।

एक अन्य विकल्प यह है कि एक हजार करोड़ रुपए के बराबर विदेशी ऋण को रोल-बैक करने के लिए वल्र्ड बैंक के साथ बातचीत की जाए जबकि 1100 करोड़ रुपए से ज्यादा राशि के ऋणों में रिलीफ के लिए रिजर्व बैंक का दरवाजा खटखटाया जाए। वल्र्ड बैंक तथा आरबीआई ने अपने ऋणों की रोल-बैक हेतु रिजर्वेशंस बनाए रखे हैं। ऐसी स्थिति में इस संस्थान के पास यही विकल्प बचता है कि सरकार से तीन हजार करोड़ रुपए का नया फंड जारी करने का आग्रह किया जाए। यदि ऐसा न हुआ तो ऑपरेशंस को बहुत ज्यादा नीचे लाना पड़ेगा और अन्य वित्तीय संस्थानों से सहायता की गुहार करनी पड़ेगी। इंडस्ट्रियल रिसेशन ने आईडीबीआई पर कड़ा प्रहार किया है जिसके चलते इस वित्त वर्ष में लगभग 1400 करोड़ रुपए का एक एनपीए प्रोविजन तैयार करना पड़ा। इस वित्तीय संस्थान के नेट में इस वित्त वर्ष की पहली छमाही के दौरान 46.7 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई है।

आस्ट्रेलिया से 250 कंटेनर चने की आवक शीघ्र

आस्ट्रेलियाई चने के 250 कंटेनर जल्दी ही मुंबई पहुंचने वाले हैं जिसके परिणामस्वरूप चने के भावों में नरमी का दौर शुरू हो गया है। तजांनिया, कनाडा, आदि के जहाज भी जल्दी ही लगने वाले हैं। कर्नाटक में देशी चने की फसल सिर पर खड़ी है और आलोच्य माह के अंत तक नए मालों की आवक शुरू हो जाने की संभावना है जबकि आगामी माह में पश्ïिचमी भारत में नए चने की आवक हो जाएगी। आयातक अवश्य ही चने के भाव ऊंचे बोल रहे हैं लेकिन अपेक्षित रूप से कामकाज नहीं होने से आयातक धीरे-धीरे चने के भाव कम करने लगे हैं जिसके परिणामस्वरूप राजस्थान, दिल्ली, इंदौर आदि में चने के भावों में नरमी का वातावरण चल रहा है लेकिन नीचे भावों में चने में बेचवाली रुकी है जिसके परिणामस्वरूप भावों में आंशिक रूप से सुधार भी हुआ है, आयातकों के पास ऊंचे पड़ते का चना आ रहा है।

सोमवार 3 दिसंबर की तुलना में आज भी चने के भावों में 100 रुपए की मंदी बताई जा रही है। सोमवार को दिल्ली चना 2220-25 और इंदौर मंडी में 2110-15 रुपए के भाव से कामकाज हुआ था जबकि आज दिल्ली 2100 इंदौर 2000-2010 रुपए के भाव बताए जा रहे हैं अन्य चने में विशेष कामकाज नहीं है। चना दाल में अपेक्षित रूप से ग्राहकी का अभाव होने से चना दाल नीचे में 2300 और ऊपर में 2325 रुपए भाव बताए जा रहे हैं दालों में जैसा कामकाज होना चाहिए वह नहीं है। तंजानिया से तुवर का आयात कामकाज सीमित मात्रा में हो रहा है। तंजानिया की तुवर के भाव ऊंचे होने से अपेक्षित रूप से कामकाज नहीं है रंगून और वर्मा तुवर की पूछपरख साधारण अच्छी महाराष्ट्र में नई तुवर के भाव 1425 और गुजरात की नई तुवर का भाव 1550 रुपए के आसपास बताया जा रहा है, लेकिन इन भावों में अपेक्षित रूप से व्यापार की स्थिति नहीं है।

लोकल तुवर के भाव कम होने से महाराष्ट्र की तुवर का व्यापार कमजोर है, आगामी माह में नई तुवर की आवक अच्छी मात्रा में शुरू हो जाएगी । हालांकि तुवर फसल कमजोर बताई जाने से आयात जारी रहेगा। मसूर 1580-85 मसरा 1600 से 10 भिंड ग्वालियर 1565 से 70 रुपए के भावों में अपेक्षित रूप से कामकाज नहीं है। उड़द के भाव धीरे-धीरे नरमी की ओर बढ़ रहे हैं। मूंग में भी अपेक्षित रूप से कामकाज नहीं होने मूंग, मसूर और उड़द के भावों में तेजी की संभावना नहीं है। गेहूं में आटा मैदा मिलों के साथ ही उपभोक्ता मांग का अभाव रहने से गेहूं के भावों में तेजी की स्थिति नहीं है। देशावर तरफ सरकार गोदाम से कम भावों में गेहूं बेच रही है इससे भी बाजार प्रभावित हो रहा है। ज्वार, मक्का, बाजरा आदि मोटे अनाजों का कामकाज जैसा चाहिए वह नहीं है, सरकारी खरीदी भी नहीं होने से समर्थन मूल्य से कम भावों में व्यापार हो रहा है। रबी के सीजन हेतु गेहूं की बोवनी भी अच्छी मात्रा में रही है।

चालू माह अथवा जनवरी माह के मध्य तक मावठे की वर्षा हो जाने पर गेहूं का उत्पादन काफी अच्छी मात्रा में हो सकता है। वैसे सरकार के पास भारी मात्रा में गेहूं का स्टाक है, ऐसी स्थिति में गेहूं की उपलब्धि में किसी तरह की कमी नहीं होने की संभावना है। गेहूं मिल ०ïवालिटी 640 से 660 लोकवन 680 से 730 मीडियम 750 से 800 रुपए 147 गेहूं 720 से 750 मीडियम 760 से 800 चंदौसी 900 से 1100 इंदौर, देवास, पीथमपुर, सेंधवा, खंडवा 640 से 700 जलगांव, अमलनेर 690 धुलिया 690 थाना 720 खपोली 725 पूना 730 कोल्हापुर, सांगली 730 ज्वार दागी 300 से 320 सीएच 340 से 400 नई देशी 500 से 650 म०का पीली 410 से 420 गज्जर सफेद 400 से 415 बाजरा 400 से 450 रुपए के भाव रहे।