Saturday, October 3, 2020

ओसाका में भारतः सुदृढ़ व संतुलित

 ओसाका में भारतः सुदृढ़ व संतुलित

भारत ने ओसाका में आयोजित जी20 शिखर सम्मेलन में डिजिटल व्यापार, भ्रटाचार विरोधी नियम एवं पर्यावरण नीतियों से लेकर आर्थिक उन्नति तक अनेक मुद्दों पर कड़ा रुख अपनाया। पूर्व राजदूत भस्वति मुखर्जी ने कुछ मुख्य बिंदुओं का उल्लेख किया

वैष्विक अर्थव्यवस्था के संचालन के लिए जी20 के रूप में एक अंतरराश्ट्रीय तंत्र की कल्पना की गई थी। इस षिखर सम्मेलन में दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं को षामिल किया गया। बीते समय में जी20 बेहद षक्तिद्दााली अर्थव्यवस्थाओं का समूह बनकर उभरा है। औपचारिक रूप से यह ‘विŸाीय बाज़ारों और विष्व अर्थव्यवस्था पर षिखर सम्मेलन’ कहलाता है। वैष्विक जीडीपी के 80 प्रतिषत का प्रतिनिधित्व करने वाले जी20 ने मज़बूत वैष्विक आर्थिक विकास को प्राप्त करने की दिषा में निरंतर प्रयास किए हैं। हाल ही में आयोजित इस षिखर सम्मेलन मंे अनेक वैष्विक मुद्दों पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई, जिनमें जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा, स्वास्थ्य, आतंकवाद उन्मूलन एवं माइग्रेषन प्रमुख थे।

बाएं से दाएं’ः त्रिपक्षीय वार्ता के दौरान जापान के प्रधानमंत्री षिंज़ो आबे के साथ अमेरिका के राश्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प और भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी

उचित संतुलन

जापान के ओसाका षहर में जी20 षिखर सम्मेलन 28-29 जून, 2019 को आयोजित किया गया था। यह पहला जी20 सम्मेलन था जिसकी मेज़बानी जापान के प्रधानमंत्री षिंज़ो आबे ने की थी। इसमें चर्चा करने के लिए आठ विशयों का चयन किया गया था, जैसे वैष्विक अर्थव्यवस्था, कारोबार एवं निवेष, अन्वेशण, पर्यावरण तथा ऊर्जा, रोज़गार, महिला सषक्तीकरण, विकास और स्वास्थ्य। यद्यपि इस सम्मेलन पर अमेरिका-चीन व्यापार संघर्श की छाया देखने को मिली, फिर भी भारत के लिए यह कूटनीतिक रूप से सफल साबित हुआ। अमेरिका के दबाव के सामने भारत ने अपनी आवाज़ रखी और 50 से अधिक देषों द्वारा समर्थित डिजिटल व्यापार में परिवर्तन का विरोध दर्ज कराया। भ्रश्टाचार मुद्दे पर व्यापक रूप से चर्चा की गई। भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने इस विशय पर भी अपने विचार रखे। इसके अलावा श्री मोदी ने संतुलन स्थापित करते हुए विभिन्न नेताओं से द्विपक्षीय मुद्दे पर वार्ता की। उन्होंने चीन, रूस तथा अमेरिका के राश्टन्न्पति और जापान के प्रधानमंत्री से अलग-अलग बैठक भी की थी।

भारत का दृश्टिकोण

इस षिखर सम्मेलन में भारत परिप्रेक्ष्य इस बात से उजागर हुआ कि उसमें भारत के ‘षेरपा’ का वर्णन किया गया। तत्कालीन केंद्रीय वाणिज्य मंत्री श्री सुरेष प्रभु ने सम्मेलन की समाप्ति के बाद पत्रकारों से वार्ता के दौरान इसकी चर्चा की थी। ‘षेरपा’ राज्य के एक प्रमुख के निजी प्रतिनिधि को संदर्भित करता है जो अंतरराश्ट्रीय बैठकों में उसके लिए आधार तैयार करता है। भारत ने जिन प्रमुख मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया उनमें गुणवŸाापूर्ण आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना तथा वैष्विक आर्थिक संदर्भ में हाल ही में जारी फाइनेंषियल एक्षन टास्क फोर्स ‘एफएटीएफ’ के मानदंडों को अपनाना सम्मिलित था। दुनिया भर में भ्रश्टाचार के विरुद्ध मुहिम चलाने पर बल दिया गया। वहीं जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर भी व्यापक रूप से चर्चा की गई। इस दिषा में षमन तथा तालमेल स्थापित करने की बात कही गई तथा मानव के सामने उत्पन्न होने वाली चुनौतियों का भी उल्लेख किया गया। अंत में, श्री मोदी ने भारत में प्रसिद्ध नए अन्वेशण ‘सबका साथ-सबका विकास’ के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किस प्रकार से सरकार समाज के विकास में जुटी हुई है। ओसाका षिखर सम्मेलन में इन प्रमुख विशयों पर सभी सदस्यों ने अपने महŸवपूर्ण विचार रखे। इसके अतिरिक्त बेहद पचीदा मुद्दे जलवायु परिवर्तन पर भी चर्चा की गई। ओसाका घोशणा-पत्र में एक अतिरिक्त अनुच्छेद को जोड़ा गया था, जो अमेरिका ने जुड़वाया था। इसमें लिखा गया थाः ‘‘अमेरिका अपने निर्णय को दोहराता है कि वह पेरिस संधि से अपना नाम वापस ले रहा है क्योंकि यह अमेरिकी श्रमिकों तथा करदाताओं को नुकसान पहुंचाता है।’’

नीचे ‘बाएं से’ः चीन के राश्ट्रपति, रूस के राश्ट्रपति, ब्राज़ील के राश्ट्रपति जायर बोल्सनारो, श्री मोदी एवं दक्षिण अफ्रीका के राश्ट्रपति सिरिल रामाफोसा हाथ मिलाते हुए तथा फोटो खिंचवाते हुए, जी20 के इतर ओसाका में ब्रिक्स सम्मेलन भी आयोजित किया गया

डिजिटल कारोबार पर गतिरोध

एक अन्य विवादास्पद मुद्दा जो जापान ने उठाया था और उसने इसके बारे में कहा था कि इसे अपनाओ अथवा हटाओ। जापान ने डिजिटल कारोबार पर चर्चा की। वह चाहता था कि जी20 के सभी सदस्य देष ओसाका ट्रैक पर अपनी सहमति दें। डिजिटल कारोबार के मुद्दे पर सभी 50 सदस्य देषों द्वारा बहुपक्षीय वार्ता को बढ़ावा देने की बात कही गई। इसका ध्येय डेटा प्रवाह को हटाने, डेटा स्थानीयकरण पर प्रतिबंध हटाने और दूसरों के बीच क्लाउड कम्प्यूटिंग की सुविधा के लिए व्यापक नियम लागू करना था। डिजिटल कारोबार के मुद्दे पर विष्व व्यापार संगठन ‘डब्ल्यूटीओ’ ने इन सिफारिषों को कभी मंज़्ाूरी नहीं दी थी। दक्षिण अफ्रीका एवं इंडोनेषिया के साथ भारत ने भी ओसाका ट्रैक का बहिश्कार किया था। इन उभरती अर्थव्यवस्थाओं का कहना था कि ओसाका ट्रैक आमतौर पर सर्वसम्मति-आधारित निर्णयों पर पहुंचने के लिए मुख्य विष्व व्यापार संगठन के सिद्धांतों को कमज़ोर करेगा। इस संबंध में भारत और दक्षिण अफ्रीका ने समझौता करने की बात कही थी। जी20 के नेता ‘‘अन्वेशणः डिजिटलकरण, विष्वास सहित डेटा मुक्त प्रवाह‘‘ के संबंध में जारी घोशणा-पत्र पर सहमत दिखे। इससे स्पश्ट हुआ कि जी20 भारत व दक्षिण अफ्रीका की मांगों के साथ सहयोग करने को तैयार है। भारत व दक्षिण अफ्रीका चाहते हैं कि ‘‘डिजिटलकरण के माध्यम से एक समावेषी, टिकाऊ, सुरक्षित, भरोसेमंद और अभिनव समाज को प्राप्त करना तथा उभरती प्रौद्योगिकियों के अनुप्रयोग को बढ़ावा देना चाहिए।’’ भारत तथा अनेक विकासषील देषों की यही मांग है कि इस संबंध में ‘‘डेटा के प्रभावी उपयोग द्वारा निभाई गई महŸवपूर्ण भूमिका, आर्थिक संवृद्धि, विकास और सामाजिक कल्याण के लिए ही हो।’’ विकासषील देषों को आषंका है कि इससे उनके यहां डिजिटल औद्योगिकीकरण प्रभावित न हो। इसलिए डिजिटल कारोबार को सबके हित में अपनाया जाए। भारत तथा अन्य विकासषील देषों ने मज़बूत कदम उठाते हुए षिखर सम्मेलन के फाइनल घोशणा-पत्र में यह जुड़वाया कि ‘‘हम अपने कार्यों को बेहतर बनाने के लिए डब्ल्यूटीओ के आवष्यक सुधार के लिए अपना समर्थन देते हैं।’’

समूह में फोटो खिंचवाते रूस के राश्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, श्री मोदी तथा चीन के राश्ट्रपति षी जिनपिंग

5जी की चुनौतियां

इस षिखर सम्मेलन में 5जी तकनीक से संबंधित मुद्दों पर भी चर्चा की गई थी। इसकी पृश्ठभूमि में अमेरिका ने मांग रखी कि अन्य देषों को चीन की प्रमुख तकनीकी कंपनी ह्युवे के 5जी नेटवर्क को प्रतिबंधित करना चाहिए। आधिकारिक रूप से मीडिया वार्ता में कहा गया कि भारत व अमेरिका को इस बात से लाभ होगा कि ‘‘भारत की क्षमता तकनीकी विकास की दिषा में स्टार्ट-अप आरंभ एवं डिज़ाइन करने की है तथा सिलिकाॅन वैली, मिलकर सभी के हित में 5जी तकनीक विकसित कर सकते हैं।’’ अमेरिका एवं चीन के राश्ट्रपति के बीच इस मुद्दे पर आपसी वार्ता भी हुई। कुछ हद तक दोनों देषों के बीच चल रहे कारोबारी संघर्श की परछाई देखने को मिली थी। अमेरिका की लगातार मांग थी की ह्युवे के 5जी नेटवर्क को प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। संभव है कि दोनों देषों के बीच चल रहा संघर्श अगले जी20 षिखर सम्मेलन तक समाप्त हो जाए। इस षिखर सम्मेलन के इतर श्री मोदी ने अमेरिका के राश्ट्रपति ट्रम्प से मुलाकात की। इस बैठक के बाद भारत के विदेष सचिव विजय गोखले ने बताया कि भारत के प्रधानमंत्री ने अपनी बात मज़बूती से रखी। भारत ने ह्युवे के 5जी नेटवर्क को प्रतिबंधित करने के मुद्दे पर अपना दृश्टिकोण स्पश्ट किया और कहा कि वह अमेरिका की मांग से सहमति नहीं रखता। 

भारत ने कहा कि वह देष के कारोबारी एवं सुरक्षा हितों को देखकर ही कोई निर्णय लेगा। श्री मोदी ने ज़ोर देकर कहा कि भ्रश्टाचार समाज के लिए हानिकारक है। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने कहा, ‘‘जी20 के सभी देषों द्वारा हर स्तर पर भ्रश्टाचार को मिटाने का काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जी20 के सभी देष इससे संबंधित कड़े कानून बनाएं।’’ ओसाका घोशणा-पत्र में भारत द्वारा सुझाए गए सभी मुद्दों को षामिल किया गया। इससे स्पश्ट हुआ कि भारत के ऊर्जापूर्ण कूटनीतिक संबंधों के कारण देष को बहुत लाभ प्राप्त हो रहा है। वैष्विक स्तर पर भारत की छवि एक षक्तिद्दााली देष के रूप उभरी है। ओसाका में भारत के संबंध में एक और बात साफ हुई कि अब भारत नीति-निर्धारक बन गया है, वह पहले जैसा नीति-धारक नहीं रहा है। भारत का आत्म-विष्वास हर स्तर पर देखने को मिल रहा है। इसकी पहली झलक 2018 में आयोजित जी20 में दिखी थी जो अर्जेंटीना के ब्यूनस आयर्स षहर में हुआ था। तभी से भारत की स्थिति मज़बूत हो रही है। वर्श 2022 में होने वाले जी20 की मेज़बानी भारत करेगा। इससे उजागर होता है कि भारत दुनिया का एक ताकतवर देष बन गया है।